शाबान महीने के बाद शुरू होता है रमजान

Sant kabir nagar Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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मगहर। अरबी के शाबान महीने के बाद पाक रमजान का महीना शुरू होता है। खुदा की इबादत करने में वैसे तो हर रोज सवाब मिलता है, लेकिन पाक महीने में सवाब 70 गुना अधिक हो जाता है। रमजान चांद पर आधारित होता है कि रोजा 29 दिन का होगा या 30 दिन का।
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मौलाना वलीउल्लाह ने बताया कि यह महीना सारे महीनों में अफजल है। इसी महीने में खुदा ने मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के ऊपर कुरान नाजिल किया था। रोजा रखना फर्ज करार दिया गया है। रमजान का चांद देखते ही तराबीह शुरू हो जाती है। भोर मे सेहरी खाकर रोजा रखा जाता है और शाम को मगरिब की अजान होने पर रोजा खोला जाता है। उन्होंने बताया कि इस महीने में इबादत करने से 70 गुना सवाब मिलता है। इस महीने की हर रात व दिन शबे कद्र है, लेकिन 27 वीं रमजान के शबे कद्र की अहमियत ज्यादा है। रोजे के तीन असरे होते हैं, पहला एक से दस तक, दूसरा दस से बीस तक तथा तीसरा बीस से 30 रमजान तक। इस महीने में नमाज पढ़ना, कुरान की तिलावत करना और अफजल है। खुदा अपने बंदों के गुनाहाें को माफ कर देते हैं। मौलाना वसीउल्लाह के मुताबिक हर अंग का रोजा होता है। किसी की बुराई करना, झूठ बोलना, किसी को कष्ट पहुंचाना, बुरी नजर से देखना, चोरी फरेब करना आदि बुराइयों पर सख्त पाबंदी है। इन बुराइयों के करने से रोजा टूट जाता है।
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