बसने से पहले ही उजड़ गया कुक्कुट पालन केंद्र

Sant kabir nagar Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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मेंहदावल/संतकबीरनगर। तहसील क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए अग्रणी केंद्रों में शुमार किए जाने वाला कुक्कुट पालन केंद्र बीस वर्षों से जीर्णोंद्वार की आशा संजोए हुए है। क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकने वाला यह केंद्र करोड़ों की जमीन पर बोझ साबित हो रहा है। यह केंद्र बसने से पहले ही उजड़ गया। अब तो लोगों ने इसके शुरू होने की आशाएं भी छोड़ दी हैं।
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बता दें कि वर्ष 1991 में मेंहदावल क्षेत्र के बढ़याठाठर के टोला खैरा में प्रदेश सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से कुक्कुट पालन केंद्र की स्थापना के लिए हरी झंडी दी गई थी। उक्त केंद्र के लिए दो एकड़ जमीन अधिग्रहित करके निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। प्रस्तावित योजना के तहत उक्त केंद्र से क्षेत्र में कुक्कुट पालन को बढ़ावा दिया जाना था। इसमें चूजों के साथ ही अंडा उत्पादन करने की भी व्यवस्था थी। लाखों रुपये खर्च करके तीन बड़े हाल बनाने के साथ ही केंद्र का प्रशासनिक भवन और जल आपूर्ति के लिए पंप हाउस व टैंक का भी निर्माण पूर्ण हो गया। लेकिन एक वर्ष बाद जब मशीनें लगाने का प्रयास शुरू हुआ तो उसी बीच सरकार बदल जाने से परियोजना खटाई में पड़ गई।
वर्तमान में कुक्कुट पालन केंद्र की चहारदीवारी और हाल धीरे धीरे करके ध्वस्त हो रहे हैं। छुट्टा पशुओं का वर्तमान में यह अड्डा बन गया है। जल आपूर्ति टैंक को छोड़कर अन्य सभी निर्माण ध्वस्त होने की स्थिति में हैं। किसी राजनैतिक दल द्वारा अब तक इसकी सुधि नहीं ली गई है। सबसे खास बात यह है कि विधानसभा और लोकसभा के लगभग सभी चुनावों में देश व प्रदेश के कई मंत्रियों का उड़नखटोला कुक्कुट पालन केंद्र के परिसर में ही उतरता है तथा विकास के लिए योजनाओं की लंबी फेहरिस्त जनता के सामने रखते हैं लेकिन कुक्कुट पालन केंद्र की दशा में सुधार नहीं हुआ। पूर्व प्रधान शिवमूरत निषाद, दीन बंधु निषाद, अरुण शुक्ल, बृजेंद्र बिहारी आदि का कहना है कि केंद्र के शिलान्यास के अवसर पर कछार क्षेत्र के साथ ही पूरे जनपद में हर्ष की लहर व्याप्त थी लेकिन अब समय बीतने के साथ सारी आशा धूमिल हो रही है।
केंद्र को विद्यालय में बदलने की मांग
मेंहदावल/संतकबीरनगर। कुक्कुट पालन केंद्र के जीर्णोद्वार के लिए आशा टूटने से दुखी कछारवासियों ने परिसर को विद्यालय में बदलने की मांग की है। अनिल त्रिपाठी, इंद्रजीत, संतोष सिंह, इंद्रसेन सिंह, गजेंद्रनाथ, मानवेंद्र सिंह आदि ने कहा कि कछार में उच्च शिक्षा केंद्रों का अभाव है। बालिकाओं को 10 किमी दूरी पर स्कूल जाना पड़ता है। केंद्र न चलने की दशा में इसे विद्यालय के रूप में परिवर्तित कर दिया जाए। जिससे उच्च शिक्षा की समस्या हल हो सके।
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