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बरसात शुरू, फिर भी नहीं बने स्पर

Sant kabir nagar Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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मेंहदावल/संतकबीरनगर। करमैनी बेलौली बांध की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा किए गए उपायों की पोल खुलने लगी है। विशुनपुर से बढ़या के बीच बनने वाले 8 स्परों में से किसी का भी निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि उच्च स्तरीय कमेटी ने वर्ष 2011-12 में ही इसके निर्माण अनुशंसा कर दी थी और शासन स्तर पर इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है।
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सूत्रों के मुताबिक, विशुनपुर से बढ़या के बीच बंधे के कटान को रोकने के लिए वर्ष 2011-12 में उच्च स्तरीय कमेटी ने इस चैनेज में 8 स्परों के निर्माण हेतु अपनी सहमति जताई थी। हाई लेवल कमेटी की अनुशंसा के बाद ड्रेनेज खंड द्वितीय ने आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। इसकी स्वीकृति भी मिल गई। परंतु बरसात शुरू हो जाने के बाद भी इन स्परों पर निर्माण कार्य नहीं शुरू हो पाया है। यहां यह बता देना जरूरी है कि विशुनपुर से बढ़या तक का चैनेज कटान की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील माना जाता है।

यही नहीं बेलौली गांव को बचाने के लिए रिंग बांध भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण इस रिंग बांध की हालत को देखकर भयभीत हैं। यदि रिंग बांध कटता है तो सीधे राप्ती नदी का पानी बेलौली गांव में प्रवेश कर जाएगा। रिंग बांध की सुरक्षा के लिए बने स्पर तथा इन पर हुई बोल्डर पीचिंग जगह जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस स्थान पर नदी बैकरोलिंग अक्सर किया करती है। बेलौली गांव के निवासी दिनेश तिवारी, राजेश तिवारी, बैजनाथ यादव, पप्पू तिवारी आदि का मानना है कि यदि बाढ़ आने से पहले इस रिंग बांध की सुरक्षात्मक उपाय नहीं किया गया तो गांव वालों को राप्ती नदी के प्रकोप से भगवान ही बचा सकता है। अधिशासी अभियंता उमेश प्रसाद यादव का कहना है कि बरसात के बाद बढ़या में स्पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा। बंधे की सुरक्षा को लेकर विभाग सतर्क है।
जर्जर पुल कभी भी बन सकता है खतरा
आसपास के ग्रामीण जर्जर पुल को लेकर भयभीत
कांटे/संतकबीरनगर। बस्ती और संतकबीरनगर को बांटने वाली कठिनइयां नदी पर स्थित धुसवा पुल का सीमेंट व मिट्टी बह जाने से अत्यंत जर्जर हो गया है। जिससे आसपास के गांवों के राहगीरों को रास्ता बदलकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ रहा है।
विकास क्षेत्र सेमरियावां स्थित धुसवा कुर्थिया मार्ग पर बना वर्षों पुराना पुल अत्यंत जर्जर हो जाने से अपने अंतिम पड़ाव पर है। इस पुल से सीमेंट गायब हो जाने के बाद आसपास के गांव चंगेरा मंगेरा, धुसवा, कैनौना, डारीडिहा के ग्रामीणों ने श्रमदान कर पुल को आने जाने लायक बनाया था। इस रास्ते से दर्जनों गावों के छात्रों तथा ग्रामीणों का मुंडेरा कस्बे में आना जाना रहता है। पुल जर्जर होने से लोगों ने आने जाने का रास्ता तक बदल दिया है। अगर कठिनइयां नदी में पिछले वर्षों की तरह बाढ़ की स्थिति आई तो पुल ढह भी सकता है। पुल में पड़ी दीवारों को लेकर चिंतित आस पास के ग्रामीण धर्मेंद्र कुमार, मान सिंह, संगम चौधरी, रामउजागिर, नरेंद्र चौधरी, मूलचंद यादव सहित अन्य लोगों ने नए पुल के निर्माण की मांग की है।

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