डायरिया से एक की मौत

Sant kabir nagar Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
मेंहदावल। स्थानीय कस्बे के नायक टोला मोहल्ला निवासी एक किशोर की रविवार को उल्टी दस्त (डायरिया) से मौत होने की खबर है। जबकि उसी परिवार के एक अन्य बालक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा कि आम खाने के बाद दोनों की स्थिति खराब हुई।
कस्बा के नायक टोला निवासी श्याम लाल का पुत्र सुरेंद्र (12) ने शनिवार को दिन में भोजन करने के बाद आम खाया। उसके कुछ देर बाद ही उसे उल्टी दस्त शुरू हो गया। परिजन उसे आनन फानन में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेंहदावल में इलाज कराने को लेकर आए। शनिवार को सुरेंद्र का तात्कालिक उपचार करने के बाद हालत ठीक देख चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी। रविवार की सुबह पुन: उसकी हालत खराब हो गई। परिजन आननफानन में एक बार फिर से उसे हास्पिटल लेकर आए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, मृतक सुरेंद्र के छोटे भाई योगेंद्र (09) को भी उल्टी दस्त शुरू हो गया। परिजनों ने उसे भी इलाज के सीएचसी मेंहदावल में भर्ती कराया है। जहां उसका इलाज चल रहा है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में डायरिया की बीमारी फैलने की चर्चा शुरू हो गई।
इस बाबत केंद्राधीक्षक सीएचसी मेंहदावल डा. डीएनपी गुप्ता का कहना है कि बाजार में जो आम बिक रहे हैं, वह घातक रसायनिक पदार्थ से पकाए जा रहे हैं। बगैर आम को धुले इन बच्चों ने सेवन कर लिया था। जिसका गलत प्रभाव पड़ा। उन्होंने लोगों को आम खाने के पहले कुछ घंटे तक पानी में भिगोने की सलाह दी।

डायरिया के मरीज बढ़े
रोजाना सात से आठ मरीज पहुंच रहे सरकारी अस्पताल
संतकबीरनगर। डायरिया की बीमारी ने अब जिले में पांव पसारना शुरू कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में रोजाना सात से आठ मरीज चिकित्सीय परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें सर्वाधिक वायरल और बैक्टीरियल मरीजों की तादाद है। ऐसे में यदि सतर्कता नहीं बरती गई तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। यह कहना है कि जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. एके शर्मा का।
डा. एके शर्मा ने बताया कि डायरिया वायरल, बैक्टीरियलऔर अमीबिक प्रकार की होती है। इस मौसम में सर्वाधिक वायरल डायरिया के मरीज अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि वायरल डायरिया में हरा दस्त होता है, जो बेहद खतरनाक होता है। ऐसे में सर्तकता नहीं बरती गई तो यह जानलेवा भी बन जाती है। इससे शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। डायरिया शुरू होते ही जीवन रक्षक घोल का प्रयोग किया जाए और समय रहते आवश्यक चिकित्सीय परामर्श लिया जाए तो निश्चित रुप से बीमारी से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि बेवजह एंटीबायोटिक्स का प्रयोग बिना चिकित्सीय परामर्श के नहीं करना चाहिए। इससे डायरिया और बढ़ जाता है।

लक्षण
तेज उल्टी के साथ बुखार आना
हरा व पानी की तरह दस्त होना
चक्कर आना

सुझाव
एक गिलास पानी में एक चुटकी भर नमक और चार चम्मच चीनी व नींबू का घोल बनाकर पिलाना चाहिए
अस्पताल में जाकर फौरन इलाज कराएं
दूषित पानी पीने से बचना चाहिए
बच्चों को पानी उबाल कर पिलाएं
सड़े गले फल न खाएं
फल को खाने से पहले एक घंटे तक पानी में छोड़ देना चाहिए। जिससे फल से रसायनिक पदार्थ की मात्रा समाप्त हो जाए

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