अच्छे प्रदर्शन पर संदेह के कारण सपा ने नहीं उतारे उम्मीदवार

Sant kabir nagar Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि सपा और बसपा को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ना चाहिए था। सपा को संदेह था कि प्रदर्शन अच्छा नहीं कर पाएंगे और 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका असर पड़ेगा, इसलिए सपा ने निकाय चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारे। मंगलवार को रीता बहुगुणा पूर्व सांसद सुरेंद्र यादव के घर पर आयोजित वैवाहिक समारोह में शामिल होने के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में बसपा से लोगों को घृणा हो गई थी और उसके विरोध में सपा के पक्ष में जनता ने विपरीत निर्णय दे दिया। सपा बसपा की शहरों में विशेष पैठ नहीं है। इसलिए इन्होंने अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे। स्थानीय निकाय चुनाव जनता के सबसे करीब होता है। शहर में नाला, पानी की निकासी की समस्या महत्वपूर्ण होती है। पार्षद और चेयरमैन का पद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी हैं। सपा ने बाहर से समर्थन दिया है। राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए को पूरा समर्थन मिल रहा है। राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। भाजपा को छोड़कर सभी पार्टियों ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव मेें कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा होगा और ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी होंगे। इस दौरान पूर्व सांसद सुरेंद्र यादव, आलोक यादव, खलीलाबाद चेयरमैन प्रत्याशी जमुना प्रसाद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कुछ ने किया काम, कुछ रहे बेकाम
सन 1971 में ग्राम सभा से टाउन एरिया बना खलीलाबाद
पहले नगर पंचायत अध्यक्ष बने अब्दुल कादिर नूरी
संतकबीरनगर। ग्राम सभा से टाउन एरिया खलीलाबाद बना तो 1971 में मेंबर्स द्वारा चुनकर नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में अब्दुल कादिर नूरी की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी हुई। परंतु बाद में अविश्वास प्रस्ताव हुआ तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा और टीएन राय कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए। बाद में कोर्ट से स्थगन आदेश हो गया। एसडीएम कुछ महीनाें के लिए प्रशासक हुए। सन 1975 के नगरपंचायत चुनाव में नागरिकाें द्वारा ओमप्रकाश खन्ना चेयरमैन चुने गए। इनके समय में सबसे बड़ा ऐतिहासिक कार्य यह हुआ कि चेयरमैन ओपी खन्ना ने रेलवे क्रासिंग से बैंक चौराहे तक का मार्ग नगर पंचायत को हैंडओवर करा लिया। इस प्रकार उसे बनवाने का अवसर मिल गया। बदहाल मार्ग को ठीक कराने और सड़क के किनारे की दर्जनाें दुकानें बनी। जिनसे नगरपंचायत खलीलाबाद के राजस्व की वृद्धि हुई। ओपी खन्ना ने शहर के मुख्य मार्ग के दोनों तरफ शोभाकारी वृक्ष लगवाए। इनके कार्यकाल में सड़क के दोनों तरफ स्ट्रीट लाइटें लगीं। वर्ष 1977 तक उनका कार्यकाल रहा। जिसे लोगों ने अब तक याद रखा है। परंतु इसके बाद 11 साल तक प्रशासक के अधीन नगर निकाय रहा और एसडीएम प्रशासक नियुक्त हुए। इस बीच 5 अगस्त 1981 को खलीलाबाद नगरपालिका घोषित हुआ।
वर्ष 1988 के 20 नवंबर को नगरपालिका परिषद के लिए हुए चुनाव में पुन: अब्दुल कादिर नूरी चेयरमैन बने। हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच अपने उदारवादी रुख के कारण हमेशा लोकप्रिय रहे। दोनों पक्षों को समझा बुझाकर राजी कर लेने की इनकी फितरत रही। जिससे कभी यहां विवाद नहीं होने पाया। परंतु 26 दिसंबर 1990 को इनका इंतकाल हो गया। उस दौरान उपाध्यक्ष रहे त्रियुगी नारायण राय को इनका कार्यभार मिला। इन्होंने 22 दिसंबर 90 से 19 जनवरी 94 तक के अपने कार्यकाल में कई जगह सड़कों के किनारे दुकानें बनवाई। पुन: कुछ माह के लिए शहर प्रशासक के हवाले रहा। वर्ष 1995 के दिसंबर में चुनाव हुआ तो ओम प्रकाश खन्ना पुन: चेयरमैन बने। उन्होंने शास्त्री नगर जाने के लिए स्वयं खड़े होकर अतिक्रमण हटवाते हुए रास्ता साफ कराया ।नेहरू चौक पर नेहरू की मूर्ति स्थापित कराई। मेेंहदावल चौराहे पर चंद्रशेखर आजाद के सामने छोटे पार्क का सुंदरीकरण कराया। वर्ष 2000 तक इनके कार्यकाल के बाद हुए चुनाव में नगर के प्रमुख व्यवसाई एवं अनेक सम्मानित शिक्षा संस्थान चलाने वाले रामकृपाल रूंगटा के हाथ में नगरपालिका परिषद की बागडोर आई। नगर के सुंदरीकरण का वायदा था। इनके कार्यकाल में दिसंबर 2000 से लेकर 30 नवंबर 2005 तक नगरपालिका के राजस्व वृद्धि के लिए अनेक दुकानें बनीं। इस बीच सड़क के डिवाइडर, सड़क के बीचों बीच पोल लगे। संयोग से पूर्व सांसद इंद्रजीत मिश्र के प्रयास से श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत मिली धनराशि से सरैया बाईपास से मेंहदावल बाईपास तक की सड़क के लिए मिली धनराशि का सदुपयोग हुआ तो शहर के भीतरी सड़क का नक्शा बदल गया।
नगरपलिका परिषद के चेयरमैन पद पर वर्ष के अंत में हुए 2005 केचुनाव में महिला सीट से शाहिना फिरदौस चेयरमैन बनी। वर्ष 2012 के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए 11 प्रत्याशी और 25 वार्डों के लिए सभासद पद के लिए 148 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

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