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खुद ही हैं बीमार, कैसे करेंगे उपचार

Saharanpur Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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सहारनपुर। सरकारी स्तर पर मरीजों का इलाज, जांच और दवाओं की स्थिति दयनीय है। खासकर जिले के ग्रामीण इलाकों और कस्बों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की हालत और भी गंभीर है। जनपद की ज्यादातर सीएचसी में बेड तो हैं, लेकिन मरीजों की जांच के लिए न पर्याप्ट डॉक्टर हैं और टैक्नीशियन। सहायक स्टाफ की भी भारी कमी है। गर्भवतियों की सिजेरियन डिलीवरी के लिए सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। कुछ केंद्रों पर तो वर्षों से ओटी का इस्तेमाल ही नहीं हुआ है और न ही एक्सरे मशीन चली हैं। स्वास्थ्य केंद्रों से अक्सर गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। कैंसर, हाई फीवर और अस्थमा आदि बीमारियों से बदनाम हो चुके सहारनपुर जिले में हर साल करीब 500 मरीज बेहतर इलाज न मिलने के कारण जान गंवा देते हैं। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार हैं ऐसे में उनसे मरीजों के उपचार की संभावनाएं और भी कम हो जाती हैं। सरकारी चिकित्सा सेवाओं के नाम पर यहां मरीजों के साथ महज छलावा सा हो रहा है। ‘अमर उजाला’ ने जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्राें की हकीकत जानने की कोशिश की, जो हालात मिले, प्रस्तुत है उनकी रिपोर्ट।
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फतेहपुर सीएचसी: रोगियों के लिए बिस्तर हैं, डॉक्टर नहीं
फतेहपुर सीएचसी में 30 बिस्तर हैं, लेकिन गंभीर रोगियों को भर्ती करने के लिए डॉक्टर नहीं हैं। यहां तीमारदारों के लिए रैन बसेरा बना है, लेकिन मरीज को भर्ती करने की कोई सुविधा नहीं है। यहां सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, महिला सर्जन के पद खाली पडे़ हैं। दंत रोग विशेषज्ञ लंबे समय से चाइल्ड लीव पर हैं। तीन माह से पैथालोजी बंद पड़ी है। जांच के लिए रोगी प्राइवेट लैब पर जाते हैं। दो साल पूर्व ब्लड स्टोरेज यूनिट का सामान आया था। वह भी प्रयोग नहीं हो सका। दून हाईवे पर स्थित होने के कारण रोज हादसों के शिकार घायल यहां पहुंचते हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ रेफर कर दिया जाता है।

नानौता सीएचसी: सिजेरियन डिलीवरी नहीं होती
नानौता में भी बस नाम की सीएचसी है। यहां पीएचसी जैसी भी सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। एक्स-रे मशीन नहीं है। पैथोलॉजी है पर नाममात्र की जांच होती है। सर्जन, दंत चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक और हड्डी रोग विशेषज्ञों के पद खाली पडे़ हैं। स्वास्थ्य केंद्र में नाममात्र की दवाइयां उपलब्ध हैं। ऐसे में ज्यादातर रोगियों को बाहर से दवा लाने को लिखी जाती है। केंद्र में केवल सामान्य प्रसव की सुविधा है। ज्यादा महिलाआें को खराब हाईवे पर खतरा मोल लेकर जिला अस्पताल में ही डिलीवरी के लिए जाना पड़ता है। सिजेरियन डिलीवरी की दशा में दूसरी जगह जाना पड़ता है।

चिलकाना सीएचसी : एक्सरे मशीन है, टैक्नीशियन नहीं
चिलकाना सीएचसी दस साल से बिना अधीक्षक के चल रही है। चिकित्सक के नौ स्वीकृत पद हैं, लेकिन एक स्थाई और दो संविदा डॉक्टर ही यहां हैं। एक संविदा नर्स है। एक्स-रे मशीन है, लेकिन टेक्नीशियन का पद खाली है। नेत्र जांच की किट है पर सहायक नहीं। 30 बिस्तर वाली सीएचसी में छह माह में एक भी रोगी भर्ती नहीं हुआ। साफ-सफाई के लिए स्वीपर भी नहीं है। रोजाना 200 मरीजाें की ओपीडी होती है, लेकिन रात में इमरजेंसी के लिए डॉक्टर नहीं मिलते।

बेहट सीएचसी: घायलों को सिर्फ रेफर करते हैं
पिछडे़ घाड़ क्षेत्र की एकमात्र बेहट सीएचसी केवल एक चिकित्साधिकारी के सहारे चल रही है। दो महिला डाक्टरों, चार चिकित्साधिकारियों, एक ईएनटी सर्जन, दो स्टाफ नर्स और दो महिला स्वीपर के पद खाली पड़े हैं। ऑपरेशन थियेटर है पर उसका लंबे समय से प्रयोग ही नहीं हो पा रहा है। स्टाफ की कमी में एक्स-रे मशीन शोपीस बनी हुई है। यहां रोजाना 150 मरीज ओपीडी करवाते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाले घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी खुद ही बीमार पड़ी हुई है।

गंगोह सीएचसी: बीमारियों के गढ़ में डॉक्टरों के लाले
बुखार से मौतों के मामले में कई वर्षोें से बेहद संवेदनशील माने जाने वाली गंगोह सीएचसी में भी डॉक्टरों के लाले पड़े हुए हैं। यहां महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा चार मेडिकल ऑफिसरों और रेडियोलोजिस्ट के पद रिक्त पडे़ हैं। इंचार्ज डाक्टर अनवर अंसारी के अलावा एक संविदा चिकित्सक है। इन दो चिकित्सकों के भरोसे ही रोजाना 450 से 500 रोगी ओपीडी कराते हैं। छह स्टाफ नर्स की जगह तीन, चार वार्ड ब्वाय की बजाय दो, चार स्वीपर की जगह एक की ही तैनाती है। एक्स-रे मशीन तक यहां उपलब्ध नहीं है।

हरौड़ा सीएचसी : वर्षों से नहीं हुआ ओटी का प्रयोग
हरौड़ा सीएचसी पर पांच स्थाई चिकित्सकों के सापेक्ष एक ही डॉक्टर तैनात है। दो चिकित्सक संविदा पर तैनात किए गए हैं। रोज करीब 300 रोगियों की ओपीडी होती है। अक्सर मरीजों यह शिकायत रहती हैं कि ज्यादातर को दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैं। ओटी कई साल से है, लेकिन सर्जन नहीं होने से इसका प्रयोग नहीं हो पाया। सर्जन के अलावा ऑपरेशन के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध नहीं है। रात में फार्मेसिस्ट के भरोसे ही मरीज होते हैं। कुल मिलाकर सीएचसी स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ी हुई है।

नकुड़ सीएचसी: खाली पड़े है अधिकांश पद
नकुड़ सीएचसी पर फि जिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और त्वचा रोग विशेषज्ञ सहित आठ पद रिक्त पडे़ हैं। तीन स्थाई और दो संविदा चिकित्सक ही अस्पताल की सारी जिम्मेदारी संभाले हैं। एक्स-रे मशीन भी काफ ी पुरानी है। फ ार्मेसिस्ट और लैब टैक्नीशियन का काम असिस्टेंट से लिया जा रहा है। सड़क हादसों में गंभीर घायलों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं। उन्हें जिला अस्पताल में रेफर की पर्ची थमाई जाती है। ऐसे मरीज कई बार रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

डॉक्टरों की कमी पूरे सूबे में
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों या जिला अस्पताल में ही नहीं बल्कि पूरे सूबे में इस समय डॉक्टरों की काफी कमी है। प्रदेश सरकार ने कुछ डॉक्टरों की तैनाती बढ़ाई है। संविदा पर भी नियुक्तियां की जा रही हैं। उम्मीद है कि मरीजों को चिकित्सा सेवाओं में कुछ सुधार होगा।
-डा. एमआर मलिक, अपर निदेशक स्वास्थ्य।

अतिरिक्त प्रभार देकर दिलाई जा रही सेवाएं
केंद्र और राज्य सरकार के बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ ही रोजाना स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले रोगियों की बेहतर चिकित्सा के लिए पर्याप्त डॉक्टर, टेक्नीशियन और नर्सें नहीं हैं। इसलिए डॉक्टराें और अन्य स्टाफ को अतिरिक्त प्रभार देकर मरीजाें को बेहतर सेवाएं दिलाने की कोशिश की जा रही है।
- डा. मोहम्मद सईद, सीएमओ।

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