दरोगा के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट

Saharanpur Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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सहारनपुर। सीबीसीआईडी मेरठ के एक इंस्पेक्टर ने सहारनपुर रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात दरोगा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी में फंसाने की कोशिश करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामला बागपत के चांदीनगर थाने में दर्ज फर्जी मुठभेड़ से जुड़ा है। उसमें सहारनपुर में तैनात दरोगा आरोपी है। एसएसपी के निर्देश पर शनिवार रात कोतवाली सदर बाजार में रिपोर्ट दर्ज हुई।
सीबीसीआईडी मेरठ के इंस्पेक्टर गजे सिंह ने बताया कि बागपत के चांदीनगर थाने में पुलिस मुठभेड़ की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जिसमें चार लोगों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने एक की गिरफ्तारी दिखाकर शाकिर, शाहिद, फरमान को फरार दिखाया गया था। शाकिर आदि के परिजनों ने आईजी को शिकायत कर मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए जिन्हें फरार दर्शाया गया, वे तो मुठभेड़ के दौरान थे ही नहीं की जानकारी दी। आईजी के आदेश पर सीओ बड़ौत रफीक अहमद ने जांच की तो आरोपी निर्दोष पाए गए। बावजूद इसके मामले के विवेचक एसआई उमेश चंद कौशिक नहीं माने और एक की गिरफ्तारी भी कर ली।
परिजनों ने सीओ की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। जांच सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर गजे सिंह को मिली। उन्होंने भी जांच में सभी को निर्दोष पाया। इस पर दरोगा उमेश चंद कौशिक के खिलाफ चांदीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उमेश लगातार उन पर उसके पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगाने का दबाव बना रहा था। जब वे नहीं माने तो उमेश ने कोर्ट के माध्यम से इंस्पेक्टर गजे सिंह, एसपी सीबीसीआईडी पंकज कुमार, तत्कालीन सीओ रफीक अहमद और उनके एक मुंशी के खिलाफ जानबूझ कर विवेचना गलत किये जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जांच एसपी बागपत जितेंद्र कुमार शाही को सौंपी गई।
इंस्पेक्टर का आरोप है कि अब उमेश ने एसपी बागपत को उसके विरुद्ध भड़काने और कोर्ट के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट में फाइनल रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाने के लिए उसके नाम से झूठा प्रार्थना पत्र तैयार कराया था। जिसकी भनक शनिवार को उसे लग गई। वह तुरंत सहारनपुर पहुंचा और उसके नाम, हस्ताक्षर आदि से तैयार कराये गये प्रार्थना को लेकर एसएसपी राजेश पांडेय से मिला। एसएसपी ने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद तुरंत कोतवाली सदर बाजार को एसआई उमेश चंद के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। कोतवाली प्रभारी बिजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। कलक्ट्रेट के सामने स्थित विशाल कम्युनिकेशन के उस कंप्यूटर और स्कैनर को भी कब्जे में ले लिया गया है, जिसमें प्रार्थना पत्र तैयार किया गया था।

यूं हुआ खुलासा
सहारनपुर। इंस्पेक्टर गजे सिंह के मुताबिक शुक्रवार को उसके पास कलक्ट्रेट सहारनपुर के सामने विशाल कम्युनिकेशन से फोन आया कि आपने जो प्रार्थना पत्र कंप्यूटर पर तैयार करने के लिए दिया था, वह तैयार है, उसे ले जाओ। इंस्पेक्टर चौंके, बोले उन्होंने तो कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया। कम्युनिकेशन संचालक को पत्र का मजमून पढ़ने को कहा तो माजरा समझ में आ गया कि उनके नाम और फर्जी हस्ताक्षर कराने की करतूत उमेश चंद की है। तुरंत इंस्पेक्टर ने प्रार्थना पत्र की एक कॉपी कंप्यूटर में ही सुरक्षित करा ली।

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