प्रदूषण से भयभीत हैं 20 गांवों के लोग

Saharanpur Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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सहारनपुर। न पानी पीने और जीने के योग्य और न हवा सांस लेने लायक। बढ़ते प्रदूषण ने वातावरण को जहरीला कर दिया है। जिले में हिंडन, यमुना, कृष्णा, नागदेव, ढमोला सहित अन्य नदियों के किनारे बसें 20 गांवों की यही कहानी है। साल दर साल हालात में सुधार होने की बजाय उलटे स्थिति बिगड़ती जा रही है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। प्रभावित गांवों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कब उनके गांव सेफ जोन में आएंगे।
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नदियों के प्रदूषण से प्रभावित हो रहे इन गांवों में बीमारियों के मामले भी सबसे अधिक सुर्खियों में आए। महेशपुर, शिमलाना, कुतबा माजरा, ढायकी, अंबेहटा चांद, टपरी, कुंडा कलां, कुंडा खुर्द, बेगी रुस्मत, बेगी नाजर, दौलतपुर, भनेड़ा खेमचंद, परागपुर आदि गांवों में कैंसर, चर्म रोग, लीवर, किडनी से लेकर बुखार, मलेरिया, आदि बीमारियों से पिछले कुछ वर्षों में 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
प्रभावित गांवों के लोग जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने यह तक मांग कर चुके हैं कि यदि नदियों की सफाई और प्रदूषण मुक्त करने के अभियान में अधिक बजट खर्च हो रहा हो या इसमें अधिक समय लगता हो तो कम से कम गांवों में जटिल बीमारियों की चिकित्सा के विकल्प तो बढ़ा दिए जाएं। कैंसर के इलाज के लिए बड़े विशेषज्ञ और अस्पताल उपलब्ध हो। ग्रामीणों के इस दर्द को देखते हुए आईएमए से जुड़े चिकित्सक और कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. प्रभात वर्मा भी सरकार के समक्ष यह मांग उठा चुके हैं।
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