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दिल्ली के लिए ट्रेनें दिलाओ रेल मंत्री जी

Saharanpur Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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सहारनपुर। रेल बजट आने वाला है। हर बार यहां के लाखों लोग दिल्ली के लिए ट्रेन और अन्य सुविधाओं की बड़ी उम्मीदें लगाते हैं, मगर पिछले कई वर्षों से उन्हें निराशा हाथ लग रही है। यात्रियों की सबसे बड़ी मांग दिल्ली के लिए ट्रेनें बढ़ाने की है। सहारनपुर की वुडकार्विंग, हौजरी, प्लास्टिक, किराना समेत अन्य कई कारोबार यहां की खास पहचान है, बावजूद यहां रेल सेवाआें की कमी है और सहारनपुर दिल्ली अब भी बहुत दूर है।
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सहारनपुर में रोजाना 160 से अधिक एक्सप्रेस, मेल और पैसेंजर ट्रेनों से करीब 20 हजार दैनिक यात्री भी सफर करते हैं। मुसाफिरों का इतना बोझ होने के बावजूद यहां के यात्रियों की पीड़ा यही है कि दिल्ली जाने के लिए ही पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं। पिछले चार पांच साल से लगातार हर रेल बजट में की जाती रही है, लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

शहर से किसी को दिल्ली जाना हो तो सुबह सवा छह बजे शालीमार एक्सप्रेस के बाद सवा नौ बजे जालंधर-नई दिल्ली एक्सप्रेस और दस बजे उज्जैनी एक्सप्रेस ही दिल्ली की प्रमुख गाड़ियां हैं। इसके बाद तो शाम साढ़े चार बजे तक दिल्ली जाने के लिए कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं है। इस अवधि में दो-तीन पैसेंजर ट्रेनें ही हैं। इनमें आम यात्रियों का ही इतना अधिक बोझ है कि बाकी के लिए जगह ही नहीं बचती। शाम को भी शताब्दी एक्सप्रेस के बाद आधी रात को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ही दिल्ली जाने का माध्यम है।
उद्यमी अशोक गांधी, शिव कुमार गौड़ और व्यापारी विवेक मनोचा, शीतल टंडन एवं विमल विरमानी का कहना है कि वैसे ही दिल्ली के लिए ट्रेनें कम हैं। ऊपर से हर साल कोहरे के नाम पर रेल सेवाएं छीन ली जाती हैं। जालंधर-नई दिल्ली सुपरफास्ट और उज्जैनी एक्सप्रेस रद्द चल रही हैं। लखनऊ जाने वाली सद्भावना भी नहीं चल रही है।
सहारनपुर से करीब आठ किलोमीटर दूर टपरी स्टेशन से दिल्ली को जाने वाली देहरादून- दिल्ली जनशताब्दी, उत्कल एक्सप्रेस, अहमदाबाद मेल को यदि इसी स्टेशन से संचालित किया जाए तो भी दिल्ली के लिए विकल्प बढ़ सकते हैं। इसमें रेल मंत्री को ज्यादा कवायद भी नहीं करनी पड़ेगी। काफी समय से टपरी से चलने वाली इन ट्रेनों का संचालन सहारनपुर से नहीं होने दिया जा रहा है। रेलयात्रियों के अनुसार दिल्ली जाने के लिए ज्यादातर लोगों को देर रात बारह बजे या तो छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पकड़नी पड़ती है या फिर सुबह 3:55 बजे जाने वाली पैसेंजर। दिन में भी चलने वाली एकाध पैसेंजर ट्रेन में दिल्ली का सफर बहुत थकाऊ और मुश्किल भरा होता है। दिल्ली जाने में यात्रियों से पांच से सात घंटे लग जाते हैं।
रेलवे स्टेशन के वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक अरविंद शर्मा मानते हैं कि जरूरत के हिसाब से दिल्ली जाने के लिए यात्रियों के पास काफी कम विकल्प हैं। दिल्ली के लिए गाड़ियों की मांग के बारे में उत्तर रेलवे मंडल मुख्यालय अंबाला और रेलवे बोर्ड को कई बार मांगें भेजी जा चुकी हैं।

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