‘सभासद, कर्मचारी, अधिकारी हैं जिम्मेदार’

Saharanpur Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
सहारनपुर। पाक जासूस शाहिद इकबाल भट्टी के फैसले में न्यायालय ने सहारनपुर पुलिस पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त शाहिद इकबाल भट्टी अगर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में सफल हुआ तो इसके पीछे स्थानीय सभासद, अधिकारीगण, कर्मचारीगण की लापरवाही से ऐसा अपराध संभव हो पाया। उन लोगों का इसमें क्या रोल रहा इसकी विवेचना भी होनी आवश्यक है। उनके द्वारा किन परिस्थितियों में और क्यों अभियुक्त शाहिद इकबाल भट्टी की मदद की गई। इस संबंध में विवेचक द्वारा विवेचना नहीं की गई। इस संबंध में विवेचक अग्रिम विवेचना कर सकते हैं। इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए एसएसपी को निर्देश दिया है।
इकबाल भट्टी ने देवराज शहगल पुत्र हरदेव राज शहगल निवासी बी/1 हकीकत नगर के रूप में 18 अगस्त 2007 को सहारनपुर में अपने जन्म का पंजीकरण नगर पालिका में करा लिया था। जन्म पंजीकरण का प्रार्थनापत्र मय शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था। शपथ पत्र का सत्यापन शिवशंकर ने किया था और उसकी जांच सफाई और खाद्य निरीक्षक जितेंद्र सिंह ने की थी। विभागीय स्पष्टीकरण मांगने पर जितेंद्र सिंह ने बताया था कि वार्ड-31 के सभासद संजय फुटेला के साथ भट्टी कार्यालय में आया था। प्रार्थनापत्र पर सभासद संजय फुटेला के मोहर और हस्ताक्षर अंकित थे। शपथपत्र का सत्यापन शिवशंकर ने कर रखा था। 6 फरवरी 1980 में पैदा होने की तिथि के सत्यापन में आरटीओ द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस और पैन नंबर की छाया प्रति भी सलंग्न करा ली गई थी। पंजाब पुलिस के खुलासे के बाद 29 सितंबर 2009 को जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया था।
सभासद की भूमिका पर नहीं हुई जांच
फैसला सुनाते वक्त मजिस्ट्रेट ने पुलिस की विवेचना पर आपत्ति जताई। इस पूरे मामले में शामिल सभासद, अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका की जांच नहीं होने पर टिप्पणी भी। दरअसल, पूरे मामले में शातिर इकबाल भट्टी ने बड़ी की चालाकी से जन्म प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड हासिल कर लिया था। इसके अलावा कई बैंकों उसने खाते भी खुलवाए थे। मामला का खुलासा होने पर उसने कोर्ट के समक्ष बयान दिया कि पाकिस्तान से आने के बाद उसके असली कागजात खो गए थे। उसने लोगों से बात की कि उसे पाकिस्तान जाना है, इन्हीं लोगों ने उसके पेपर बनवाए थे।
बीओआई की जांच में हुआ था भट्टी खुलासा
ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर ऑफ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की जांच में भट्टी की पूरी सच्चाई सामने आई थी। तत्कालीन एएफआरआरओ एसके नेगी ने कोर्ट को बताया कि शाहिद इकबाल भट्टी पुत्र आमिर शाहिर भट्टी निवासी 1/ए, शादमानी कालोनी कश्मीरी चौक लाहौर है। यह जानकारी लाहौर से जारी भट्टी के पासपोर्ट नंबर केडी 330620 से मिली। पासपोर्ट 31 मार्च 2004 को जारी किया गया और एक्सपायरी 30 मार्च 2009 को थी। 24 मार्च 2005 को पाकिस्तान से अमृतसर में प्रवेश के दौरान उसके सारे प्रपत्र पासपोर्ट, वजीाआदि चेक किया गया। 31 मार्च 2005 को वह वापस पाकिस्तान चला गया। दोबारा वह जून 2005 में किस रास्ते से भारत आया इसकी जानकारी नहीं हो पाई। पुलिस जांच में भारत आने के बाद वह पहले पटना गया फिर सहारनपुर में रहा और 2006 में वह पंजाब चला गया। 2 अगस्त 2008 को पंजाब में भट्टी को गिरफ्तार किया गया।

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