15 दिन में पांच बार बदला शमीना का नाम

Saharanpur Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
सहारनपुर। 100 घंटे बीतने के बाद भी शमीना अख्तर के मामले में पुलिस के हाथ अब भी खाली है। अफसर बिल्कुल खामोश हैं। चुप्पी के बीच शमीना अख्तर की कहानी में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस के पास आने से पहले भी शमीना का नाम 15 दिन में पांच बार बदला जा चुका था। मानव तस्करों के हत्थे चढ़ने के बाद शमीना का कदम-कदम पर नाम बदला गया था। मामले में पुलिस की किरकिरी होने के बाद अब जल्द-जल्द से इसकी फाइल बंद किए जाने की तैयारी है। पुलिस को अब कोर्ट के आदेश का इंतजार है।
24 घंटे तक पुलिस को नचाने वाली शमीना अख्तर को पुलिस ने बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया। हालांकि शमीना का बयान शुक्रवार को दर्ज होगा। इस मामले की फाइल बंद करने में जुटी पुलिस अब शमीना को मालदा पहुंचाने की जल्दबाजी में है। हालांकि शमीना के परिजनों ने गरीबी का हवाला देकर सहारनपुर तक आने में असमर्थता जता दी है। ऐसे में न्यायालय के आदेश के बाद उसे पुलिस ही मालदा तक पहुंचाने की तैयारी में है।
बहाने बनाना छोड़ो, मानव तस्करों को पकड़ों
मानव तस्करी की शिकार शमीना मामले में पुलिस अब केवल बहानेबाजी में जुटी है। पूरे मामले में पुलिसिंग की हवा निकलने के बाद भी पुलिस मानव तस्करों पर शिकंजा कसने में गंभीर नहीं है। कदम-कदम पर ज्यादती झेलने के बाद पुलिस के पास पहुंची पुलिस अब इस मामले को दबाने में लगी है। हालांकि पुलिस का दावा है कि तीन टीमें बनाकर मानव तस्करों की तलाश की जा रही है। खुद को तीसमार खां बताने वाली पुलिस अब तक मानव तस्करों का सुराग तक नहीं लगा पाई है।
मानव तस्करी की शिकार शमीना
एफआईआर में नहीं बदला शमीना का नाम
मीडिया को मनगढ़ंत कहानी बताने वाली सहारनपुर पुलिस अब इस पूरे मामले में बैकफुट पर है। मगर, एफआईआर में अब तक शमीना का नाम गौरी घोसले ही चल रहा है। एफआईआर में शमीना ने मानव तस्करी और बलात्कार की शिकायत की है। शमीना के बयान के आधार पर वह दिल्ली से तलहेड़ी तक पहुंचने में पांच बार बिकी थी। दिल्ली में टैक्सी ड्राइवर ने सुनीता को बेचा। सुनीता ने दिल्ली में ही उसे दो लोेगों को बेच दिया। इसके बाद वह देहरादून लाई गई, वहां भी दो हाथों में बिकने के बाद नाम बदलकर तलहेड़ी के राजू को बेची गई। पुलिस इस मामले में भी कोई जांच नहीं कर रही है।
बार्डर कनेक्शन बन सकती है मुसीबत
इस मामले में हीरो से जीरो बनी पुलिस अब उसके बार्डर कनेक्शन को जांचने में जुटी है। हालांकि बार्डर कनेक्शन की पड़ताल हवा-हवाई ही हो रही है। मगर, यह बात सामने आई है कि शमीना का गांव कलियाचक के पास है। यह गांव बांग्लादेश बार्डर से सटा है। इसके अलावा बीएसएफ के जवान से इसका प्रेम प्रसंग खुफिया एजेंसियों को परेशान कर रहा है। बीएसएफ के जवानों के नाम सामने आने के बाद भी पुलिस अब तक उनके पास तक नहीं पहुंची है। खुफिया एजेंसियों को शमीना का बार्डर कनेक्शन परेशान कर रहा है।
पहले भी पुलिस की लापरवाही पड़ी है भारी
सहारनपुर के ऐसे लापरवाह अफसरों से तो यहां के लोगों को अब भगवान ही बचाए। हाई प्रोफाइल मामला बताकर पहले तो पुलिस अफसर इस मामले में सुर्खियां बटोरने में जुटे रहे। अब तफ्तीश में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को पुलिस नजरअंदाज कर रही है। इस मामले में भी पुलिस का लापरवाह रवैया मुसीबत बन सकती हैै। इससे पहले एक फर्जी आयकर अधिकारी ने एसएसपी के साथ ठगी की और पुलिस फोर्स लेकर एक डॉक्टर के यहां छापेमारी कर दी थी। पुलिस के इस लापरवाह रवैये से लोग खौफजदा हैं।
इनकी सुनिए
शमीना को बृहस्पतिवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। शुक्रवार को बयान होने के बाद न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा। शमीना के परिजनों ने गरीबी का हवाला देकर यहां आने में असमर्थता जताई है। ऐसे में पुलिस जरूरत पड़ने पर पुलिस उसे मालदा तक पहुंचाएगी। शमीना की शिकायत के आधार मानव तस्करों की तलाश की जा रही है।
डा. अनिल कुमार मिश्र, एसपी देहात

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