दिमागी बुखार के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

Saharanpur Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
सहारनपुर। तीन साल बाद जिले में फिर से ें दिमागी बुखार का कहर प्रारंभ होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला अस्पताल में भर्ती पांच बच्चों में से तीन बच्चों की मौत के बाद आनन फानन में बच्चों के इलाज के इंतजाम शुरू किए गए हैं। जिला अस्पताल में दिमागी बुखार के इलाज के लिए स्पेशल वार्ड बना कर स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट किया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एमआर मलिक ने बाल रोग विभाग के समस्त चिकित्सा अधिकारियों, नर्सों एवं अन्य स्टाफ सदस्यों को निर्देश दिए हैं कि दिमागी बुखार वाले बच्चों को प्राथमिकता से उपचार किया जाए। इन बच्चों के इलाज के लिए चौबीस घंटे कम से कम एक डाक्टर और सहयोगी स्टाफ अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए यहां तीन चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई है।
स्पेशल वार्ड के लिए तैनात किए गए चिकित्सकों में बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर नरेंद्र कुमार, डाक्टर आरके चौधरी और डाक्टर आरके तिवारी शामिल हैं। दिमागी बुखार के इंतजामों के बारे में जब अस्पताल जाकर डॉक्टरों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वार्ड में आने वाले सभी बच्चों पर नजर रखी जा रही है ताकि दिमागी बुखार वालों को अलग कर इलाज दिलाया जा सके। अभी नकुड़, गंगोह और सरसावा क्षेत्र से इसके मासूम शिकार मिले हैं।

दिमागी बुखार से मरने वाले
वर्ष भर्ती मरीज मौतें

2002 79 57
2003 100 78
2004 159 114
2005 239 175
2006 105 94
2007 136 97
2008 15 8
2009 30 22
2010 0 0
2011 0 0
2012 5 3

नोट : यह आंकड़ा जिला अस्पताल में दिमागी बुखार से भर्ती होने वाले मासूमों का है। इन बच्चों की उम्र एक साल से 12 साल के बीच की है।
2002 से चल रहा प्रकोप
वर्ष 2002 से 2009 तक 500 से अधिक मासूमों की जिंदगी लेने वाला दिमागी बुखार तीन साल बाद फिर से यमराज बनकर लौटा है। चिकित्सकों के अनुसार यह बुखार सबसे अधिक नवंबर से जनवरी की अवधि में ही असर दिखाता है। इसलिए इस अवधि में सतर्क रहने की जरूरत है।
कैसे पहचाने
-यदि बच्चे को बार-बार दौरे पड़ रहे हों
-बच्चे के मुंह से झाग आ रहे हों
-मासूम अपनी आंखों को ऊपर खींच रहा हो
-लगातार बेहोशी की हालत बढ़ रही हो
-बुखार में बड़बड़ाने के साथ गर्दन पलट रही हो

बीमारियों से हो चुकी हैं 300 मौतें
जिला अस्पताल में भर्ती पांच बच्चों में दिमागी बुखार की पुष्टि तो विभाग ने अब जाकर की है। हो सकता है कि जिले में बुखार से पहले मरने वाले बच्चों की मौत का जिम्मेदार भी दिमागी बुखार ही रहा हो, मगर ज्यादातर बच्चों के स्थानीय और झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज करवाने के कारण उनमें इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। मलेरिया, टाइफाइड, वायरल, डेंगू आदि से जिले में पिछले तीन माह के दौरान करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य केंद्रों को किया अलर्ट : सीएमओ
जिन क्षेत्रों से दिमागी बुखार के लक्षणों वाले मरीज आए हैं। उन क्षेत्रों के अलावा जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है।

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