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‘दीनी तालीम से मुकम्मल हों मुसलमान’

Saharanpur Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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देवबंद। मलेशिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले दारुल उलूम के छात्र मौलाना डा. यासिर नदीम और पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले मौलाना मोहम्मद शकेब कासमी को सम्मानित किया गया। इस दौरान दीन की तालीम से मुकम्मल होने पर जोर दिया गया।
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ईदगाह रोड स्थित मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह में हुए कार्यक्रम में संस्था के मोहतमिम एवं दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि दीन की तालीम हासिल करने वालों पर अल्लाह की खास रहमत रहती हैं। उन्होंने कहा की आज इस्लाम के खिलाफ तरह-तरह की साजिशें हो रही हैं। इन ताकतों के सफाए के लिए जरूरी है कि मुसलमान दीन की तालीम से मुकम्मल हो। दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना अब्दुल्ला मारुफी ने कहा कि कुरआन पाक की एक आयत से साफ है कि मुसलमानों में एक जमात इल्मी तखस्सुस (जांच कमेटी) की होनी चाहिए, जिसका काम सिर्फ दीन की तालीम हासिल करने वालों पर मेहनत और उनकी जांच करना है। दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना खिजर मोहम्मद कश्मीरी ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद की डिग्री दुनिया की किसी भी यूनिवर्सिटी से बड़ी डिग्री है। मौलाना अब्दुर्रशीद बस्तवी ने मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने भी विचार व्यक्त किए। मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने डा. यासिर नदीम और शकेब कासमी को शॉल और किताबें देकर सम्मानित किया। अध्यक्षता इस्लाम कासमी और संचालन मौलाना फुजैल अहमद ने किया। कारी वासिफ, मौलाना जैनुद्दीन, मुफ्ती अहसान, मौलाना खालिद गुल आदि रहे।

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