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दिहाड़ी मजदूर बना नेशनल मेडलिस्ट

Saharanpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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सहारनपुर। लुटा दी कायनात ए जिंदगी जिसकी चाह में, वो मेरे साए से भी अब दामन बचाते हैं।
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जिस खेल के मैदान में पसीना बहाकर कभी उसने सोने-चांदी के मेडल जीते, दर्शकों की तालियां बटोरीं और उसके प्रशंसकों ने उसे कंधों पर उठा लिया हो, उसी मैदान पर वह खिलाड़ी सौ-दो सौ रुपये के लिए लोगों को पानी पिलाए। यह इस देश, प्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। ऐसी ही कहानी है नेशनल मेडलिस्ट सतेश की। 19 सालों तक उन्होंने खेल विभाग की सेवा की, लेकिन अब उन्हें वहां से भी निकाल दिया गया है। अब यह खिलाड़ी दिहाड़ी मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहा है।
नंदपुरी कालोनी निवासी सतेश पाल के परिवार में पत्नी रेखा के अलावा तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी मोनिका की वह शादी कर चुका है जबकि दो सपना, पायल पढ़ रही हैं। अभी तक स्थानीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में कार्य कर वह परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लेकिन अब विभाग ने उसे बजट न होने के बात कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इससे उस पर परिवार के पालन पोषण का संकट गहरा गया है।
सतेश बताते हैं कि वर्ष 1993 में उसकी खेल उपलब्धियां और बेगारी देखकर तत्कालीन जिला क्रीड़ा अधिकारी ने उसे स्टेडियम में कार्य दिलवाया था। बीच-बीच में कार्य को लेकर विवाद भी हुए जो कोर्ट तक भी पहुंचे लेकिन वह 19 सालों से खेल विभाग की सेवा में तत्पर रहा है। उसे कई जगह नौकरी के चांस भी मिले, लेकिन खेल से जुड़ाव होने कारण वह नहीं गया। दुख जताते हुए कहते हैं कि सेवा का यह सिला मिलेगा, ऐसा कभी सोचा भी नहीं था। वर्तमान में स्थिति यह है कि परिवार के पालन पोषण के लिए उसने हाल में ही स्टेडियम मेें हुई जिला एथलेटिक्स प्रतियोगिता में दिहाड़ी मजदूर के रूप में पानी पिलाया।
ये हैं सतेश की उपलब्धियां
- 2007 में दिल्ली में आयोजित इंडियन ओपन मैराथन में प्रथम स्थान।
- 2011 में यमुनानगर में आयोजित मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रथम।
-1998 में 35 वीं ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता में तृतीय स्थान
- 1993 में सहारनपुर डिस्ट्रिक्ट साइकलिंग रेस में द्वितीय स्थान।
- 1999 में सहारनपुर में ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता में तृतीय स्थान।
- 1990 में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा प्रायोजित दौड़ में ओपन में तृतीय स्थान।
- 1991 में युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग की दौड़ में प्रथम।
- 1991, 92 में खेल निदेशालय द्वारा आयोजित क्रास कंट्री में प्रथम स्थान।
विभाग के पास बजट नहीं
जिला क्रीड़ा अधिकारी संतोष रावत कहती हैं कि सतेश स्टेडियम में ठेका प्रथा पर कार्यरत था। अब खेल विभाग के पास बजट नहीं है। जिसके चलते उसे हटाया गया है। बजट आने पर ही मौका दिया जाएगा।

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