रेल हादसे रोकने हैं तो लोको पायलट बढ़ाओ

Saharanpur Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
सहारनपुर। लगातार बढ़ती रेल दुर्घटनाओं की असली वजह क्या है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या किया जा सकता है? रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के अलावा उत्तर रेलवे अंबाला मंडल की ओर से कुछ माह पूर्व रेल अफसरों और कर्मचारियों से इसके कारण एवं सुझाव मांगे गए थे। अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन की अंबाला मंडल इकाई के माध्यम से अब लोको रनिंग कर्मचारियों ने अपनी राय डीआरएम आफिस को भेजी है। इसमें कहा गया है कि दुर्घटनाओं का कारण मानवीय भूल नहीं बल्कि मानवीय कमी ज्यादा है।
इस बारे में जोनल संगठन सचिव विश्वनाथ और सह सचिव नवीन कुमार सैनी कहते हैं कि पिछले काफी समय से रेल दुर्घटनाओं के लिए मानवीय भूल बताकर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लोको पायलट को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है जबकि असली कारणों की अनदेखी की जा रही है। इसलिए कैडर विशेष को बदनाम करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि रेलवे के परिमंडल मुख्यालय के स्टेशनों पर इस समय 480 लोको पायलटों की कमी है जबकि गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हद तो यह है कि खाली हो रहे पदों को भरने की कोशिश नहीं की जा रही है।
उनका कहना है कि सहारनपुर में 339 लोको पायलट हैं जबकि 150 की कमी है, वहीं अंबाला में 358 लोको पायलट हैं और 197 पायलट कम चल रहे हैं। भटिंडा और कालका का भी यही हाल है। भटिंडा में 287 लोको पायलट हें जबकि 111 कम चल रहे हैं और कालका में 81 हैं जबकि 22 पायलटों की कमी है। जब ट्रेनों को चलाने वाले पायलटों की इतनी संख्या में कमी होगी तो दुर्घटनाओं को कम कैसे किया जा सकता है। इस कमी के बावजूद पायलटों एवं रनिंग कर्मचारियों से निरंतर काम कराया जा रहा है। ओवरलोड में ही हादसे बढ़ रहे हैं। इसलिए दुर्घटनाएं रोकनी हैं और यात्रियों की सुरक्षा करनी है तो पायलट बढ़ाने होंगे।

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