रेल पार्सल रेट बढ़ने से उद्यमियों को लगा झटका

Saharanpur Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
सहारनपुर। रेल पार्सल रेट बढ़ने से जिले में विश्वविख्यात वुडकार्विंग उत्पादों से लेकर हौजरी, रेडीमेड गारमेंट्स और लोहा कारोबारियोें को सबसे अधिक झटका लगेगा। इन कारोबारों से जुड़े निर्यातकों एवं कारोबारियों का कहना है कि इससे प्रतिमाह पांच से आठ लाख तक का व्यापार प्रभावित होगा।
ट्रकों से माल भेजेंगे तो दुगुनी लागत आएगी
सहारनपुर से वुडकार्विंग उत्पाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बैंगलुरु, चेन्नई, सूरत, जयपुर समेत कई बड़े शहरों में जाते हैं। रेल पार्सल के माध्यम से 200 से 300 नग रोजाना यहां से निकाले जाते हैं। पार्सल रेट में 25 फीसदी इजाफा काफी नुकसान देने वाला साबित होगा क्योंकि ट्रेनों की जगह ट्रकों से माल को इन शहरों तक पहुंचाना बेहद मुश्किल होने के साथ इसकी लागत भी दो से तीन गुना हो जाएगी।
- शेख फैजान, निर्यातक वुडकार्विंग
हौजरी कारोबार को भी परेशानी
जिले में वुडकार्विंग के बाद हौजरी और रेडीमेड गारमेंट्स का काम बड़े स्तर पर है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित अन्य शहरों में रोजाना माल सप्लाई होने और वहां से कई तरह का सामान आने के कारण रोजाना 180 से 300 नग रेल पार्सल के लिए बुक कराए जाते हैं। पार्सल रेट बढ़ने से इनकी कास्ट बढ़ेगी। ट्रकों से माल भेजने का कोई सही विकल्प नहीं है। सड़कों में गड्ढे हैं और लंबी दूरी पर भेजने से लागत कई गुना बढे़गी।
-घनश्याम माहेश्वरी, हौजरी कारोबारी
आयरन बिजनेस हो जाएगा बहुत महंगा
शहर के लोहानी सराय में लोहे का कई तरह का कारोबार करने वाले दर्जनों कारोबारी रोजाना पंजाब के शहरों और अन्य जगहों से जरूरी सामान मंगाते हैं और यहां से माल काफी मात्रा में बाहर भेजते हैं। रोजाना 100 से 180 नग लोहे के सामान पार्सल बुकिंग के लिए रहते हैं। चालीस फीसदी ट्रांसपोर्ट का बोझ रेलवे पर ही है। इसलिए लोहा कारोबारियों के लिए घाटा बढ़ने जा रहा है। मुनाफे के विकल्प और कम हो जाएंगे।

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