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वुडकार्विंग उद्योग को पहले जैसी पहचान दिलानी वाली हो सरकार

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2019 12:12 AM IST
वुडकार्विंग उद्योग को पहले जैसी पहचान दिलानी वाली हो सरकार
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सहारनपुर। दुनिया में अलग पहचान रखने वाले सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग को पहले जैसी पहचान चाहिए। वर्ष भर में करीब दो हजार करोड़ का टर्नओवर होता है। लकड़ी पर नक्काशी पूरे विश्व में पसंद की जाती हैं, बावजूद इसके सरकार की ओर से प्रोत्साहन नहीं मिलता है। इस कारण वुडकार्विंग उद्योग अपनी पहचान खो चुका है।
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लोकसभा चुनाव को लेकर वुडकार्विंग कारोबारियों के अपने मुद्दे हैं। उन्हें ऐसी सरकार चाहिए जो वुडकार्विंग उद्योग को पहले जैसी पहचान दिला सके। इस उद्योग के सामने कई समस्याएं आ रहीं हैं। इस वजह से यहां के हस्तशिल्पी राजस्थान के जोधपुर और जयपुर पलायन कर रहे हैं। वुडकार्विंग उद्योग को चलाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिल रहा है। यही स्थिति रही तो कारोबारी वुडकार्विंग उद्योग के साथ दूसरे किसी राज्य में पलायन कर जाएंगे।


सहारनपुर की लकड़ी पर नक्काशी को पूरा विश्व पसंद करता है। 1950 में एक्सपोर्ट शुरू हुआ था। दुनिया में 35 प्रतिशत एक्सपोर्ट यूएसए और 65 प्रतिशत अन्य देशों में होता है। दो हजार करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है। सरकार को सभी टैक्स देते हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से वुडकार्विंग उद्योग की उपेक्षा हो रही है। इस वजह से हस्तशिल्पी जोधपुर और जयपुर पलायन कर रहे हैं। शीशम की लकड़ी पर प्रतिबंध है, जिससे दिक्कत आती है।--------एमए इकबाल, अध्यक्ष हैंडीक्राफ्ट्स आर्टीशियन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन सहारनपुर

नोटबंदी और जीएसटी का सीधा असर वुडकार्विंग उद्योग पर पड़ा था। इससे छोटे व्यापारियों का कारोबार खत्म हुआ, और बड़े व्यापारियों को दिक्कतें उठानी पड़ीं। वुड कार्विंग कारोबारी कई बार अपना दर्द बता चुुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। यही स्थिति रही तो व्यापारी किसी अन्य प्रदेश में वुडकार्विंग उद्योग स्थापित करने के लिए पलायन कर जाएंगे।--------आरिफ खान, वुडकार्विंग कारोबारी

सहारनपुर को वुडकार्विंग सिटी घोषित करना चाहिए। विदेशों में वुडकार्विंग के लिए डॉलर फिक्स होते हैं, लेकिन हिंदुस्तान की मुद्रा बढ़ती और घटती रहती है, जिससे विदेशों में माल भेजने पर कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। कारोबार के लिए देश के व्यापारियों की मुद्रा भी चीन की तरह फिक्स होनी चाहिए।-------नैय्यर अली, वुडकार्विंग कारोबारी

पहले कंटेनर के जरिए सहारनपुर से सीधा दूसरे राज्यों और जिलों में माल भेजा जाता था। यहीं पर कस्टम ड्यूटी की व्यवस्था थी। एलसीएल (लूज कंटेनर लोडेड) की व्यवस्था थी, जिसके जरिए व्यापारी अपना माल कंटेनर के जरिए भेजते थे। मगर, एफसीएल (फुल कंटेनर लोडेड) होने की वजह से छोटे कारोबारी अब अपना माल नहीं भेज पाते हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हुआ है।----असद खान, वुड कार्विंग कारोबारी

शीशम की लकड़ी से प्रतिबंध हटना चाहिए। उत्तर प्रदेश में शीशम अधिक मात्रा में होता है, लेकिन यहां के व्यापारी इस पर काष्ठ कला नहीं कर पाते हैं। क्योंकि, सरकार ने प्रतिबंध लगा रहा है, जबकि दूसरे प्रदेशों में ऐसा नहीं है। इस प्रतिबंध को हटाना चाहिए।---------------कामिल खान, वुडकार्विंग कारोबारी

विद्युत व्यवस्था में सुधार तो हुआ है, लेकिन ट्रांसफार्मर फुंक जाने पर उसे बदलवाने में 15 दिन तक लग जाते हैं। विद्युत सप्लाई न होने की वजह से वुडकार्विंग कारखानों में काम प्रभावित होता है। वुडकार्विंग कारोबारियों के लिए अलग फीडर बनना चाहिए। ----शमशाद खान, वुडकार्विंग कारोबारी

सहारनपुर में ऐसा माहौल बनना चाहिए, जिससे वुडकार्विंग कारोबार को पहले जैसी पहचान मिल जाए। आज सहारनपुर का वुडकार्विंग कारोबार दुनिया में अपनी पहचान खो चुका है। शहर की सड़कें और सफाई व्यवस्था बेहतर हो। ताकि विदेशी नागरिक यहां आए तो यहीं का होकर रह जाए।--------------नौशाद, वुडकार्विंग कारोबारी

केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों की वजह सहारनपुर के वुडकार्विंग कारोबार की उपेक्षा हुई है। दो हजार करोड़ का सालाना कारोबार करते हैं, जबकि जयपुर और जोधपुर चार हजार करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करता है। इसकी वजह यह है कि जयपुर और जोधपुर में वुडकार्विंग कारोबार को सरकार की ओर से प्रोत्साहन मिलता है। यही स्थिति सहारनपुर में हो जाए तो हम पहले नंबर पर आ सकते हैं।-------अभिषेक, वुडकार्विंग कारोबारी

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