नवाब रामपुर की 1073 एकड़ भूमि के बंटवारे में कोई कानूनी अड़चन नहीं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2020 10:39 PM IST
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रामपुर। रामपुर के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां के पौत्र पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने कहा है कि 1073 एकड़ भूमि के बंटवारे में कोई भी कानूनी अड़चन नहीं है। उन्होंने 18 मार्च 2003 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति जारी करते हुए कहा है कि मर्जर एग्रीमेंट के मुताबिक 1073 एकड़ भूमि नवाब रजा अली खां की निजी संपत्ति है।
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पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां ने प्रेस वक्तव्य में कहा है कि सिविल अपील नम्बर 1712/1997 में सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च 2003 को सुनाए गए अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा है कि मर्जर एग्रीमेंट के अनुच्छेद 4 के अनुसार रामपुर के नवाब 15 मई 1949 को अपनी समस्त संपत्तियों के पूर्ण स्वामित्व, उपयोग और उपभोग के हक़दार थे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को अलग से सहमति पत्र भेजा था कि सूची में शामिल चल और अचल संपत्तियां भूतपूर्व शासक की निजी सम्पत्तियां होंगी। सूची के मद संख्या 6 में कृषि भूमि एरिया 1073 एकड़ का उल्लेख है। 1 जुलाई 1954 को राज्य सरकार ने रामपुर के शासक की निजी भूमि को छोड़कर पूर्व शाही राज्य के क्षेत्र में स्थित भूमि को निहित करते हुए इसी अधिनियम की धारा 4 (1) के अधीन एक और अधिसूचना जारी कर दी थी जिससे स्पष्ट है कि विवादित भूमि भूतपूर्व शासक की निजी संपत्ति थी और इसे सीलिंग एक्ट से मुक्त रखा गया था।नवाब काजिम अली खां ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस निर्णय के प्रस्तर 10 से लेकर 15 में स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण अपीलार्थीगण द्वारा धारित भूमियों पर सीलिंग एक्ट की धारा 6 के अधीन अभिमुक्ति के प्रभाव पर विचार करने के दौरान अत्यंत दूषित था और त्रुटिकारित की थी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त किया था। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट को नए सिरे से रिट याचिका का निस्तारण करने के लिए आदेश जारी किये गए थे। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रस्तर 10 से 15 में उल्लिखित तथ्य एवं विधिक स्थिति को ध्यान में रखने की हिदायत दी गई थी। उन्होंने बताया की सुप्रीम कोर्ट 2003 में ही स्पष्ट कर चुका है कि रामपुर के अंतिम शासक की 1073 एकड़ भूमि निजी है। इसलिए इसके बंटवारे में कोई कानूनी अड़चन नहीं है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह प्रक्रिया जारी है।

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