रामपुर में बाढ़ से मची तबाही, पानी के तेज बहाव से कटी सड़कें

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 12:15 AM IST
flood situation in rampur
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रामपुर। जिले में आई बाढ़ ने तबाही मचा दी है। सड़कों से लेकर तटबंध तक कट गया है। जिले के सैकड़ों गांवों में पानी घुसने के साथ ही फसलें तबाह हो गईं हैं। दिल्ली-लखनऊ और रामपुर-नैनीताल हाइवे तक पर बाढ़ का पानी आने से दोनों हाईवे बंद करने पड़े। इसके अलावा राज्य मार्गों पर भी बाढ़ का पानी आ गया, जिससे रामपुर का स्वार, टांडा, दढ़ियाल, मसवासी से संपर्क कट गया। वहीं, बाढ़ आने के बाद जिला प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से राहत एवं बचाव के कार्य में जुट गया। प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के साथ एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) भी बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में जुट गई। लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर लाया गया। इस दौरान बाढ़ पीड़ितों को अपने घर, मकान और सामान की चिंता सता रही है।
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रविवार से पहाड़ी एवं मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश हो रही है। इससे रामनगर बैराज पर पानी का दबाब बढ़ गया, जिस कारण बैराज से सोमवार रात से लेकर मंगलवार तक ढाई लाख क्यूसेक पानी कोसी नदी में छोड़ दिया गया। इसी वजह से रामपुर की कोसी नदी, भाखड़ा नदी, पीलाखार नदी समेत जिले की छोटी छोटी नदियां उफना गईं। मंगलवार सुबह से ही पानी रामपुर में दाखिल होना शुरू हो गया, जो धीरे धीरे बढ़ता गया।

इससे मंगलवार रात को करीब आठ बजे सैदनगर क्षेत्र के ग्राम खिजरपुर में बना बांध तीन स्थानों से कट गया, जिससे नदी का पानी गांवों में तेजी से जाने लगा। रात में ही स्वार, टांडा, मसवासी, दढ़ियाल, शाहबाद, बिलासपुर, रामपुर समेत जिले के तमाम इलाकों के सैकड़ों गांवों में पानी घुस गया। अचानक बाढ़ आने पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों की छतों पर जाना शुरू हो गए। बमुश्किल लोगों ने जागकर ही रात गुजारी। बाढ़ को लेकर लोगों में दहशत हो गई। जबकि, पानी के तेज बहाव की वजह से गांवों की सड़कें कट गईं। किसानों की फसलें पानी में तबाह हो गईं हैं। इसके साथ ही रामपुर-नैनीताल, दिल्ली-लखनऊ हाइवे पर भी नदियों का पानी आ गया, जिस कारण दोनों हाइवे को पुलिस प्रशासन ने बंद करा दिया। बाढ़ की वजह से जिला मुख्यालय से स्वार, टांडा, दढ़ियाल, मसवासी का संपर्क भी कट गया।
वहीं, बाढ़ का पानी आने एवं बांध कटने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अफसर सतर्क हो गए। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वैभव शर्मा समेत सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदारों ने अपने अपने क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों को अलर्ट करने के साथ ही निगरानी शुरू कर दी। तुरंत एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट कर दिया गया। अफसरों ने रात में ही राहत एवं बचाव का कार्य शुरू कर दिया।
एसडीआरएफ की टीमों के साथ ही पुलिस एवं प्रशासन के कर्मचारी भी लोगों को बाढ़ से बचाने की कवायद में जुट गए। ट्रैक्टरों व नाव की मदद से ग्रामीणों को निकाला गया। रातभर यही सिलसिला चलता रहा। वहीं, बुधवार को सुबह होते ही टीमें पूरी ताकत से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गईं। इस बीच ग्रामीणों को अपने मकान और सामान को लेकर चिंता सताती रही। वहीं, बाढ़ पीड़ितों को खाने पीने की चीजें भी पहुंचाई गईं।

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