आडिट में खुल रही मनरेगा की पोल

Rampur Updated Fri, 22 Nov 2013 05:45 AM IST
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रामपुर। मनरेगा के सोशल आडिट में विकास की पोल खुल रही है। कहीं जाब कार्ड बनाने में गड़बड़ी की गई तो कहीं बिना एमबी के भुगतान किया गया। कई कार्य मौके पर नहीं पाए गए। जॉब कार्ड धारकों का रजिस्टर भी तैयार नहीं किया गया है।
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केंद्र सरकार ने मनरेगा का सोशल आटिड कराने का फैसला लिया है। प्रैक्टिकल के तौर पर बीस गांवों का चयन टीमें बना दी गई हैं। साथ ही जिला स्तरीय अधिकारी भी लगाए गए हैं। सोशल अडिट सात नवंबर से शुरू हो गया है। टीमें अब तक कई गांवों का आडिट कर चुकी है। आडिट में तमाम कमियां पकड़ में आ रही हैं। शाहबाद के चकपुर कदीम, मिलक के आगापुर, ठिरिया विष्णु, पैंगरबरपुर, बिलासपुर के पिपलिया जट, सैदनगर के परचई, हौंसपुर, बगरौावा, चमरौवा के सिकरौल, स्वार के शादीनगर हजीरा का आडिट हो चुका है। बाकी गांवों का भी आडिट किया जा रहा है।
टीमों को इन गांवों में भी कमियां मिल रही हैं। कई गांवों में बिना एमबी के लाखों का भुगतान कर दिया गया। कई गांवों में बाहरी गांवों के लोगों को भी जॉब कार्ड बना दिए गए। कुछ लोगों में डबल नामों से कार्ड बना दिए। कई कार्य मौके पर नहीं मिले। बल्कि कार्य कागजों में दर्शा दिए गए। हालांकि अभी किसी भी गांव की रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी है।
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