हादसों से निबटने को तैयार नहीं है स्वास्थ्य विभाग

Rampur Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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रामपुर। स्टाफ व संसाधनों की कमी से जूझ रहा सेहत महकमा किसी बड़े हादसे से निबटने में सक्षम नहीं है। हादसा होने की स्थिति में सेहत विभाग की कमियों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू होती है, लेकिन कुछ दिनों के बाद स्थिति ज्यों की त्यों हो जाती है। अवकाश वाले दिन तो सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा होती है। इमरजेंसी सेवा के नाम पर अस्पतालों में मरहम पट्टी करने वाले भी मौजूद नहीं होते हैं। घायल अगर अधिक संख्या में हैं तो डाक्टर व स्टाफ के हाथ-पांव फूलने लगते हैं।
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टांडा में हुए हादसे ने वहां के सीएचसी के साथ-साथ जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मरीजों की इलाज में लगा स्टाफ अपने कार्य के प्रति कितना जवाबदेह है? इसका पता इस बात से चलता है कि ड्रिप चढ़ाने में भी गलती की जा रही है। इस गलती को किसी डाक्टर ने नहीं पकड़ा, बल्कि कैबिनेट मंत्री आजम खां ने पकड़ा। मंत्री ने जब इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात की तो कई लोग उनकी हिमायत में आ गए। अगर कभी कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ गई या फिर कोई हादसा हो गया तो लोगों को इलाज कैसे उपलब्ध कराया जाए। आपदा प्रबंधन को लेकर तो सीएचसी, पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक में व्यवस्था नहीं है।

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