सातवीं दिल्ली की बात ही निराली

Rampur Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
रामपुर। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डा. एसवाई कुरैशी ने 1654 में बसाई गई सातवीं दिल्ली के शाहजहानाबाद को हर अंदाज में निराला कहा। उन्होंने शाहजहानाबाद में पिछले समय में कुछ आई तबदीलियों का उल्लेख कर कहा कि उर्दू का जन्म इसी शाहजहानाबाद के उर्दू बाजार में हुआ था।
रजा लाइब्रेरी के दरबाद हाल में रविवार को ‘शाहजहानाबाद का समाज एवं संस्कृति’ विषय पर स्मृति व्याख्यान हुआ। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डा. एसवाई कुरैशी ने कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक ओल्ड देहली, लिविंग ट्रेडिशन में लिखा है। पहली दिल्ली महाभारत काल में बसाई गई। तब से दिल्ली सात बार उजड़ी और सात बार बसाई गई। सातवीं दिल्ली मुगल बादशाह शाहजहां ने 1654 में शाहजहानाबाद नाम से बसाई थी। जामा मसजिद के आसपास बसा क्षेत्र ही शाहजहानाबाद है। शाहजहानाबाद का चांदनी चौक क्षेत्र शाहजहां की बेटी जहां आरा ने बसाया था। चांदनी चौक के निकट स्थित उर्दू बाजार में उर्दू जबान ने जन्म लिया था। इस बाजार में विभिन्न क्षेत्रों के सैनिक आते थे। अलग-अलग जबानों के मिलने पर उर्दू जबान बनी। कभी इस बाजार में उर्दू और फारसी की किताबों की दुकान हुआ करती थीं। अध्यक्षता कर रहे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के उपाध्यक्ष सैयद शाहिद मेहंदी ने कहा कि दिल्ली में गंगा नहीं बहती, फिर भी इस देश की गंगा जमुनी तहजीब दिल्ली से निकलती है। इसमें डा. एसवाई कुरैशी और सैयद शाहिद मेहंदी को दीवाने-हाफिज पांडुलिपि की लघु चित्र की प्रतिकृति भेंट की गई। लाइब्रेरी के निदेशक प्रोफेसर एसएम अजीजुद्दीन ने कहा कि अंग्रेज भी शाहजहानाबाद की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नहीं बदल सके। संचालन समन्वयक शुजाउद्दीन ने किया। रमशा फौजाना ने सभी का आभर व्यक्त किया। इसमें डा. अनवार उल्ला खां, शरीफ उर रहमान खां, बाबर अली खां, डा. अखलाक, डा. तलत अजीज, डा. मेहंदी हसन, डा. किश्वर सुल्ताना, डा. जहीर सिद्दीकी, आतिफ एजाज आदि रहे।

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