हाईकोर्ट से भी नहीं मिली पूर्व डीएम को राहत

Rampur Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
रामपुर। काश्तकार के उत्पीड़न के मामले में फंसे पूर्व जिलाधिकारी मोहम्मद मुस्तफा को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी है। वह स्थानीय कोर्ट की ओर से जारी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें झटका देते हुए पूरे मामले को दुबारा स्थानीय कोर्ट के सुर्पुद कर दिया है। अब इस मामले की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में होगी।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ताशका गांव निवासी प्रीतम सिंह ने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया था,जिसमें आरोप लगाया कि 21 अगस्त 2006 को सुबह नौ बजे सिविल लाइंस इंस्पेक्टर आले हसन उसे सिविल लाइंस थाने लाए,जहां तत्कालीन डीएम मुस्तफा की मौजूदगी में परियोजना प्रबंधक आरपी कटियार,ठेकेदार हुकुम चंद्र अग्रवाल, लेबर इंचार्ज हितेंद्र चौधरी, लेखपाल दीवान सिंह ने हाईकोर्ट की रिट वापस लेने के लिए उन्हें मारापीटा साथ ही भाई के साथ भी मारपीट की गई और झूठा मुकदमा कायम कर जेल भेज दिया,जिसके संबंध में उनके द्वारा मानवाधिकार आयोग से शिकायत की। कार्रवाई न होने पर कोर्ट की शरण ली। सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी को तलब कर लिया था,लेकिन इस मामले में कोई भी आरोपी उपस्थित नहीं हुआ। इस मामले में 29 सितंबर को सीजेएम ने सभी केगैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे,जिस पर पूर्व डीएम ने अपने अधिवक्ता इमरान उल्ला के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट दायर की, जिसमें उनका कहना था कि वह एक जिम्मेदार पद पर अधिकारी थे उनको इस मुकदमे में गलत फंसाया है। वादी ने कोई मेडिकल रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बालकृष्ण नारायण ने आदेश पारित किया है कि मुस्तफा संबंधित न्यायालय में धारा 245(2) सीआरपीसी के अंतर्गत प्रार्थना पत्र दें। सुनवाई के दौरान संबंधित कोर्ट आरोपियों के खिलाफ कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करें।

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