रात में वार्डन व छात्राओं को सता रहा असुरक्षा का डर

Raebareli Updated Fri, 24 Jan 2014 05:46 AM IST
रायबरेली। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं हैं। शासन के आदेश होने के बाद भी इन स्कूलों में महिला होमगार्डों को तैनात नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में स्कूल की वार्डन व बच्चियों को शाम होते ही असुरक्षा का डर सताने लगता है। सभी स्कूलों में भवन व बाउंड्रीवाल बने हैं, लेकिन कस्बों से दूर होने के कारण सभी को परेशानी होती है कि कभी भी कोई घटना न घट जाए। स्कूलों में बिजली, पानी व अन्य सुविधाओं की कमी है। जिले में 13 कस्तूबा गांधी आवासीय स्कूल संचालित हैं। इसमें 10 स्कूलों में वार्डन काम कर रही हैं। अमावां, बछरावां और शिवगढ़ में प्रभारी वार्डन तैनात हैं। सभी स्कूलों में चार-चार स्थायी व पार्ट टाइम शिक्षिकाओं के अलावा एक-एक लेखाकार भी कार्यरत हैं। चौकीदार व चपरासी तैनाती है किन्तु यह आए दिन गायब रहते है।
सभी स्कूलों के स्वयं के भवन और बाउंड्रीवाल बनी हैं, लेकिन हरचंदपुर, महराजगंज, बछरावां और ऊंचाहार के अलावा कहीं बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी है। शाम होते ही स्कूलों में अंधेरा हो जाता है। ऐसे में बच्चियां पढ़ाई भी नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा अंधेरे में छात्राओं को डर भी लगता है। वार्डेन किसी तरह बच्चियों का हौसला बढ़ाती हैं। शासन से सुरक्षा के संबंध में सभी कस्तूरबा स्कूलों में महिला होमगार्ड रखने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आज तक होमगार्ड नहीं रखे गए हैं। हालांकि वार्डनों ने डीएम की ओर से जारी किए गए आदेश को संबंधित थानों में रिसीव भी करा दिया था, लेकिन आज तक सुरक्षा के संबंध में पुलिस विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया।
परेशानी के बीच स्कूलों में रहतीं वार्डन कस्तूरबा स्कू लों की वार्डन बच्चियों के साथ रात में भी स्कूलों में ही रहती हैं। जगतपुर की वार्डन गीतांजलि का कहना है कि बिजली न होने से रात में परेशानी होती है। सुरक्षा के भी पूरे बंदोबस्त नहीं है। पिछले अगस्त माह में थाने में पत्र रिसीव कराया था। खीरों की वार्डन मीनाक्षी मिश्रा का कहना है कि रात में परेशानी होती है।
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अभिभावक चाहते स्कूलों में हो सुरक्षा के इंतजाम
खीरों-जगतपुर। कस्तूरबा स्कूलों में पढ़ रही बच्चियों के अभिभावकों को कभी स्कूल से बाहर तो कभी स्कूल परिसर में ही मिलाया जाता है। अभिभावक कमलेश कुमारी का कहना है कि पहुंचने पर बेटी को गेट पर ही बुलाकर मिलाया जाता है। अभिभावक निर्मला का कहना है कि सुरक्षा के बंदोबस्त स्कूलों में किए जाएं। अभिभावक गुरुदीन का कहना है कि प्रशासन से स्कूलों में सुरक्षा के पूरे प्रबंध करने चाहिए, क्योंकि रात में परेशानी होती है। अभिभावक रतीपाल का कहना है कि पुलिस विभाग को सुरक्षा के लिए ध्यान देना चाहिए।
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अंधेरे में लगता डर, सुरक्षा की व्यवस्था की जाए
खीरों-जगतपुर। कस्तूरबा स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को अंधेर में डर लगता है। एक तो बिजली नहीं ऊपर से सुरक्षा की व्यवस्था न होने के कारण परेशानी होती है। छात्रा रोशनी का कहना है कि दिन में तो ठीक, लेकिन रात में अंधेरा होने के बाद डर लगता है। छात्रा सुधा देवी का कहना है कि वार्डन व टीचर के होने के कारण परेशानी नहीं होती, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की जाए। छात्रा अंजली का कहना है कि बिजली की व्यवस्था हो जाए तो पढ़ाई भी ठीक हो जाए और डर भी न लगे। छात्रा सोनिका ने बताया कि रात में अंधेरा होने के कारण डर लगता है।
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सभी थानों को रात में गश्त के दौरान कस्तूरबा स्कूलों के आसपास नजर रखने के आदेश दिए गए हैं। सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर पुलिस भेजी जाती है।
राजेश पांडेय
पुलिस अधीक्षक
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चार स्कूलों में बिजली की व्यवस्था हो गई है। अन्य स्कूलों के लिए बजट मांगा गया है। धन मिलते ही बिजली लगवा दी जाएगी। समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करके व्यवस्था सही करायी जाती है।
संदीप चौधरी
बेसिक शिक्षा अधिकारी

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