मिल चालू न होने से किसानों को दोहरी चपत

Raebareli Updated Mon, 25 Nov 2013 05:41 AM IST
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रायबरेली। परेशानी अन्नदाताओं का पीछा नहीं छोड़ रही है। कभी पानी, बिजली, उर्वरक की कमी तो कभी फसल तैयार होने के बाद उसे बेचने की चिंता। कुछ ऐसा ही गन्ना किसानों के साथ है, जो दोहरी मार से परेशान हैं। चीनी मिल चालू न होने से उनका गन्ना नहीं बिक पा रहा है। कुछ किसान तो कम रेट में क्रेशरों पर गन्ना बेच रहे हैं। खेत खाली न होने से गेहूं की बोवाई ठप है। एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान उनका अभी भी चीनी मिल दबाए बैठी है।
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सांसद सोनिया गांधी के क्षेत्र में इस बार तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर किसानों ने गन्ने की फसल बो रखी है। दरियापुर चीनी मिल की बंदी के बाद यहां के किसानों का गन्ना हैदरगढ़ चीनी मिल (बाराबंकी) भेजा जाता है। नवंबर बीतने वाला है, लेकिन हैदरगढ़ चीनी मिल चालू नहीं हो सकी है। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चीनी मिल चालू करने का आदेश तो दिया, लेकिन उनका यह आदेश बेअसर साबित हुआ।
इधर, चीनी मिल के शुरू न होने से किसान चिंतित। खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है। चीनी मिल न शुरू होने से फसल की कटाई नहीं हो पा रही है। साथ में उसे खेत खाली करके गेहूं की बोवाई भी करनी है, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। कुछ किसान तो चीनी मिल की आस छोड़कर अब क्रेशरों पर गन्ना बेच रहे हैं। क्रेशर मालिक प्रति क्विंटल 125 रुपये की दर से गन्ना खरीद रहे हैं, जो सरकारी रेट से बहुत कम है। यही नहीं किसानों का 1.78 करोड़ का भुगतान अभी भी बकाया है। आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक क्रय केंद्र तक नहीं खोले गए हैं।
इनसेट
चीनी मिल को रेट पर खरीदना है गन्ना
अगैती गन्ना 290 रुपये प्रति क्विंटल
सामान्य गन्ना 280 रुपये प्रति क्विंटल
रिजेक्ट वैरायटी 275 रुपये प्रति क्विंटल

इनसेट
जिले में खोले जाएंगे 13 क्रय केंद्र
गन्ना विभाग के अफसरों के मुताबिक गन्ना खरीदने के लिए तैयारी कर ली गई है। इसके तहत जिले में 13 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर गन्ना खरीदने के बाद हैदरगढ़ चीनी मिल भेजा जाएगा। मिल की ओर से किसानों का भुगतान किया जाएगा। चीनी मिल चालू न होने से समस्या आ रही है।


कहीं लागत निकालना न हो जाए मुश्किल
सतांव/सरेनी/इन्हौंना/राही। बढ़ती महंगाई के बावजूद किसी तरह फसल तैयार करने वाले किसान चीनी मिल के चालू न होने से चिंतित हैं कि कहीं मिल चालू नहीं हुई तो उनकी लागत भी नहीं निकल पाएगी। सतांव ब्लॉक क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी कल्लू, राजकुमार, पूरे छीट मजरे कोरिहर के बबलू यादव, मलिकमऊ के लाखन कुशवाहा, गुरुबख्शगंज के किसान इमामबख्श कहते हैं कि किसी तरह फसल तैयार करो तो बेचने में दिक्कत आती है। मिल चालू नहीं हुई तो मजबूरन क्रेशर में गन्ना बेचना पड़ेगा। कुछ यही कहना है सरेनी ब्लॉक क्षेत्र के पहुरी गांव के प्रहलाद सिंह और शीतलखेड़ा गांव के किसान छतरपाल सिंह का। कहते हैं कि क्रेशर में 125 रुपये क्विंटल की दर से गन्ना बेचना पड़ रहा है। राही ब्लॉक क्षेत्र के जरौला गांव निवासी धुन्नी यादव, साठिका का पुरवा मजरे अयासपुर डीही गांव अखिलेश यादव, करमचंद्र यादव, गयादीन यादव भी गन्ने की बिक्री न होने से नाखुश हैं। कहते हैं कि जल्द समस्या नहीं सुधरी तो धरना देकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। इन्हौंना क्षेत्र के किसान बुद्धी का कहना है कि प्रदेश सरकार किसानों को अपना हितैषी बताती है, लेकिन मिल चालू नहीं हुई है।



इनसेट
मुख्यमंत्री ने चीनी मिल चालू करने का आदेश दिया है। दिसंबर तक हैदरगढ़ चीनी मिल शुरू हो जाएगी। किसानों का गन्ना खरीदने के लिए जिले में 13 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। अभी भी किसानों का भुगतान बकाया है। इसके लिए अब तक कई बार चीनी मिल को लिखा-पढ़ी की गई है, लेकिन भुगतान नहीं हो पा रहा है। प्रयास है कि जल्द किसानों का भुगतान करा दिया जाएगा।
अजय कुमार सिंह, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक
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