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झोपड़ी व जर्जर भवनों में पढ़ने को विवश नौनिहाल

Raebareli Updated Mon, 11 Feb 2013 05:30 AM IST
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रायबरेली। नौनिहालों को स्वस्थ और शिक्षित करने की मंशा से चलाए जा रहे आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल हैं। विभाग की ओर से भवन तक नहीं मुहैया कराया जाता है। ऐसी स्थिति में झोपड़ी तो कहीं जर्जर भवनों में केंद्र चलाए जा रहे हैं। नौनिहालों के भविष्य को लेकर कोई भी अफसर गंभीर नहीं दिख रहा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के साथ शिक्षित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके तहत जिले के 15 ब्लॉक में 2359 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। इसमें बमुश्किल 20 फीसदी केंद्रों को ही निजी भवन उपलब्ध हैं। बाकी 80 फीसदी भवन झोपड़ी, जर्जर कमरों, प्राथमिक विद्यालय या पंचायत भवनों में चल रहे हैं। निजी भवन न होने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं। वहीं उनसे अक्सर भवन भी खाली करा लिए जाते हैं। कोई एक स्थान सुनिश्चित न होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों का भी मोहभंग होने लगता है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को रफ्तार पकड़वाने की जगह अफसर चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की माने तो कई बार अफसरों को पत्र लिखा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। दूसरे भवनों में किराया तक अपनी जेब से देना पड़ता है। विपरीत परिस्थितियों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उचित देखभाल होना मुश्किल है।
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