कहीं निरस्त न हो जाए संविदा के 51 पदों की भर्ती!

Raebareli Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग में संविदा के 51 पदों की भर्ती की प्रक्रिया पर संदेह होने के बाद अफसरों की नींद हराम हो गई है। एक पद की कैटेगरी तय न होने व 10 पदों पर हाईकोर्ट से स्टे आने के बाद विभाग के अधिकारी घबरा गए हैं। पूरी की पूरी प्रक्रिया के विवाद में फंसने के बाद अब अंदर ही अंदर चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग शुरू हो गई है। चयन प्रक्रिया को अकेले अपने सिर पर रखकर ढोने वाला स्वास्थ्य विभाग का एक अधिकारी अंतिम समय तक रिजल्ट की सूची जारी कराने के प्रयास में जुटा है। मामला उजागर होने के बाद साठगांठ करने वाले अभ्यर्थियों में भी हड़कंप मच गया है। इससे भर्ती प्रक्रिया के निरस्त होने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि इस पर अभी कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
जिले में महिला चिकित्सा अधिकारी समेत 51 पदों के लिए संविदा भर्ती की प्रक्रिया अगस्त से आरंभ की गई। आवेदन पत्र आने के बाद पिछली 7 व 8 सितंबर को डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी, डिप्टी सीएमओ एके चौधरी, जिला क्षयरोग अधिकारी ओपी वर्मा व डॉ. निशा सोनकर की गठित टीम ने सभी पदों के लिए अभ्यर्थियों को बुलाकर साक्षात्कार लिया। सभी पदों के लिए पांच सौ से अधिक अभ्यर्थियों ने विभिन्न पदों के लिए आवेदन किया था।
साक्षात्कार का काम पूरा होने के बाद परत दर परत भर्ती प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही की पोल खुलने लगी। पहले फैमिली वेलफेयर काउंसलर (एफडब्ल्यूसी) की कैटेगरी तय न होने पर प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई। वहीं हाईकोर्ट नेे लैब टेक्नीशियन के 3 पदों व एक्स-रे टेक्नीशियन के 7 पदों के चयन पर रोक लगा दी। सूत्रों का कहना है कि विभाग साक्षात्कार के बाद रिजल्ट भी घोषित करने वाला था, लेकिन हाईकोर्ट से स्टे आने के बाद मामला पलट गया। हालांकि एफडब्ल्यूसी के पदों पर खडे़ हुए विवाद के संबंध में सीएमओ ने स्वास्थ्य महानिदेशक से मार्ग दर्शन मांगा है। अधिकारी शेष अन्य पदों के रिजल्ट को घोषित करने का मूड भी बना चुके हैं, लेकिन डीएम व सीडीओ के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की रिजल्ट घोषित करने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी पूरी तरह से प्रयास में हैं कि जल्द ही रिजल्ट घोषित कर दिया जाए। इस बात को लेेकर वह डीएम व सीडीओ के दफ्तर के चक्कर भी काट रहे हैं। उधर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर संदेह होने के बाद इसे निरस्त करके नए सिरे सेे चयन कराने की मांग की है। वहीं विवाद खड़ा होने के बाद अधिकारियों का सुख चैन हराम हो गया है।

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