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नौ दिन में 300 से ज्यादा संदिग्ध कोरोना मरीजों की गई जान

Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 12:46 AM IST
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प्रतापगढ़। जिले में कोरोना से मौतों का सरकारी आंकड़ा भले ही 150 से भी कम हो, लेकिन जिला अस्पताल की रिपोर्ट इससे बहुत अलग है। बीते नौ दिनों के भीतर ही जिला अस्पताल में 300 से अधिक कोरोना के संदिग्ध मरीजों की मौत हुई है। अधिकांश लोगों का ऑक्सीजन लेवल कम था और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इनमें कई लोगों की एंटीजन जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई।
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कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में कोहराम मचा रखा है। संक्रमित मरीजों के साथ मृत्युदर भी बीते दिनों भी तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती कराए जाने वाले मरीजों में से करीब 33 प्रतिशत संदिग्ध कोरोना मरीज प्रतिदिन दम तोड़ दे रहे हैं। इलाज के दौरान नौ दिनों के भीतर 300 से ज्यादा कोरोना संदिग्ध मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जान गंवाने वालों में से ज्यादातर लोगों की जांच नहीं हो पाई थी। हालत नाजुक देखकर चिकित्सक भर्ती कर इलाज शुरू कर देते थे। जब तक जांच होती और रिपोर्ट आती तब तक मरीज दम तोड़ दे रहे थे। इन मरीजों में कोरोना के लक्षण साफ-साफ दिख रहे थे। अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने और तेज बुखार या फिर बदन में तेज दर्द होने पर परिजन इन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे।

अधिकतर लोगों की नहीं हो पाई जांच
जान गंवाने वाले कोरोना के संदिग्ध मरीजों में अधिकांश की जांच नहीं हो सकी। ऑक्सीजन लेवल गिरता देख परिजन आननफानन जिला अस्पताल लेकर पहुंच रहे थे। चिकित्सक जान बचाने के लिए ऐसे मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर देेते थे। जब तक जांच कराई जाती तब तक मरीज दम तोड़ दे रहे थे।
मौत के चार दिन बाद 18 लोगों की रिपोर्ट आई पॉजिटिव
स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि संक्रमितों की मौत के चार से पांच दिन के बाद 18 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बाद में उनके घर पर टीम भेजकर सभी सदस्यों की जांच कराई गई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।
15 अप्रैल के बाद जिला अस्पताल में कोरोना के संदिग्ध मरीजों की मृत्यु दर बढ़ गई। इसके पहले कुछ ठीक था। सभी की जांच कराई जा रही थी। बहुत से ऐसे मरीज थे जिनकी रिपोर्ट एंटीजन किट से जांच में निगेटिव आ रही थी। सीटी स्कैन कराने के बाद पता चल रहा था कि उन्हें कोरोना है। हालांकि हर एक मरीज से सीटी स्कैन नहीं कराया जा सकता था। आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लेकर भेज दिया जा रहा था। रिपोर्ट आने से पहले मरीज की मौत होने पर परिजन शव लेकर चले जाते थे। विरोध करने पर वे मारपीट पर आमदा हो जाते थे।
डॉक्टर पीपी पांडेय, सीएमएस, जिला अस्पताल

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