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मोबाइल और डायरी एसटीएफ के कब्जे में

प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 30 Jul 2018 12:45 AM IST
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कोहड़ौर के व्यापारी भाइयों की हत्या का खुलासा करने में जुटी एसटीएफ ने मोबाइल व दो डायरी को कब्जे में ले लिया। घटना के समय प्रयोग होने वाले मोबाइल नंबरों में एसटीएफ शूटरों को तलाश रही है। स्वाट टीम ने रानीगंज से एक व कोहड़ौर से दो लोगों को उठाया है, जो बिना आईडी प्रूफ के सिम बेचते हैं।  
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कोहड़ौर बाजार निवासी व्यापारी श्यामसुंदर व श्याममूरत की 25 जुलाई की रात दुकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया। घटना से आक्रोशि त लोगों ने 21 घंटे तक इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर जाम लगाए रखा। चूंकि मृत व्यापारी से रंगदारी मांगी गई थी। इसलिए पुलिस उसी पर काम करती रही, लेकिन आखिर में पुलिस भी घटना रंगदारी को लेकर न होने की बात कहने लगी। घटना का खुलासा करने के लिए एसटीएफ लखनऊ के इंस्पेक्टर हेमंत भूषण सिंह और इलाहाबाद फील्ड यूनिट को लगाया गया है। एसटीएफ ने व्यापारी की दुकान से हिसाब किताब वाली दो डायरी व मोबाइल अपने कब्जे में लेकर छानबीन तेज कर दी है। एसटीएफ घटना के समय प्रयोग होने वाले मोबाइल नंबरों के जरिए कातिलों काके खोज रही है। सूत्रों की मानें तो मोबाइल की काल डिटेल के साथ ही डायरी में लेनदेन करने वालों से पूछताछ में कोई अहम राज मिल सकता है। रविवार को स्वाट टीम ने रानीगंज से फर्जी आईडी पर सिम बेच रहे युवक को उठा लिया। कोहड़ौर इलाके से भी दो संदिग्ध युवकों को उठाया गया है। तीनों से फर्जी सिम बेचने वालों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। रंगदारी में प्रयोग मोबाइल नंबर की पहचान तीनों से कराई जा रही है, लेकिन पकड़े गए तीनों युवक कुछ भी बता पाने में असमर्थ हैं। एएसपी पूर्वी पूर्णेंदु सिंह ने बताया कि घटना का खुलासा करने के लिए एसटीएफ भी लगी हुई है। हर बिंदुओं पर गहराई से छानबीन की जा रही है। जल्दबाजी में पुलिस कोई कदम नहीं उठाएगी। जब तक कि ठोस साक्ष्य पुलिस के हाथ न लग जाए।


बहीखाते को जमीन निगल गई या आसमान
कोहड़ौर बाजार के व्यापारी भाइयों की हत्या के बाद लेनदेन का बहीखाता जमीन निगल गया या आसमान। परिवार के लोग अनभिज्ञता जता रहे हैं।  पुलिस को भरोसा है कि बहीखाते में ही हत्या का राज भी छिपा है।
कोहड़ौर बाजार निवासी श्यामसुंदर व उनके भाई श्याममूरत की 25 जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद से ही पुलिस 21 घंटे तक हलाकान रही। यहां तक कि घटनास्थल का 27 जुलाई को पुलिस बारीकी से निरीक्षण व फोरेंसिक जांच करा सकी थी। उसी दिन पुलिस ने दुकान के भीतर छानबीन की। कारोबार से संबंधित बहीखाते की तलाश में पुलिस ने कई घंटे तक पसीना बहाया, लेकिन कामयाबी नही मिली। पुलिस ने बहीखाते के लिए परिवार के लोगों से भी बातचीत की, लेकिन हर कोई अनभिज्ञता जताता रहा। उस बहीखाते में लगभग एक करोड़ से अधिक के लेनदेन का हिसाब लिखा हुआ है। कुछ लोगों के मोबाइल नंबर की डायरी मिली थी। जिसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया था। सूत्रों की मानें तो उस बहीखाते में हर दिन के कारोबार के साथ ही उधारी का पूरा ब्यौरा लिखा हुआ था। पुलिस को भरोसा है कि हो न हो बहीखाते में ही हत्या का राज छिपा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने खुद परिवार के लोगों से बातचीत की, लेकिन कोई कामयाबी नही मिली।  

दुकान की तिजोरी में रखा था बहीखाता
दुकान के भीतर तिजोरी में बहीखाते को रखा जाता था। नौकर पप्पू की मानें तो दिन भर सामान की बिक्री अलग रजिस्टरों में लिखी जाती थी। शाम को हिसाब बहीखाते में लिखा जाता था। जिसे बाद उसे तिजोरी या काउंटर में रखा जाता था। लेजर बुक में लेनदेन का पूरा हिसाब दर्ज होता था। घटना के बाद दुकान के भीतर कौन-कौन घुसा था। किसने ताला खुलवाया था और किसके कहने पर ताला खोला गया था, पुलिस अब इसकी जांच में जुटी है।

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