वही हुआ जिसका अंदेशा था

Pratapgarh Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। एसपी का अंदेशा सही साबित हुआ। थानेदार मनमानी से बाज नहीं आए। परिणामस्वरूप प्रशासन शांतिपूर्ण मतदान कराने में नाकाम रहा।
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एसपी दीपककुमार को पहले ही कुछ थानेदारों की निष्ठा पर संदेह था। इसीलिए उन्होंने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर छह से अधिक थानेदारों को बदलने की अनुमति मांगी थी। वह पत्र पर पत्र लिखते रहे मगर आयोग ने ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप मतदान के दिन पुलिस की भद्द पिट गई। एसओ सांगीपुर तो पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सके। थाने से महज पचास गज दूर स्थित गांधी इंटर कालेज बूथ पर घटनाएं रोक पाने में नाकाम रहे। कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को पीटा गया। मतदान कर्मी से दुर्व्यवहार भी हुआ। सपा प्रत्याशी पर भीड़ ने हमला किया।
एक पार्टी का प्रत्याशी वोट देने आया था। उसके भाई को पकड़ लिया गया। प्रत्याशी आया तो उसे भी थाने में रोक लिया गया। परिणामस्वरूप उसका पूरा परिवार वोट देने से वंचित रह गया। यह जानकारी जब पार्टी नेताओं को हुई तो उन्होंने डीएम और एसपी से शिकायत की। इसके बाद उसके परिवार को वोट डालने दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने पहले ही आशंका जताई थी कि कुछ थानेदारों के कारण पुलिस की किरकिरी हो सकती है। इस कारण उन्हें हटाने के लिए उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। मगर आयोग ने ध्यान नहीं दिया। इसी तरह कई और थानेदार अपनी जिम्मेदारी निभा पाने में विफल रहे।
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