पांव उनके हैं कमजोर जो वोट नहीं देते

Pratapgarh Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। ‘वतन के नाम पर मेरे पांव में आ जाती है जान, पांव उनके हैं कमजोर जो वोट नहीं देते। आने से मेरे बूथ पर गर देश सुधर जाएगा, तो मजबूरियां मेरे पांव की बेड़ी नहीं हो सकतीं।’ कवि अनूप उपाध्याय अनुपम की यह पंक्तियां मतदान के दिन बूथों पर सटीक दिखीं। पांव से मजबूत तमाम लोग वोट डालने घर से नहीं निकले। मगर चारपाई पकड़ चुके वृद्ध देश का भविष्य संवारने के लिए मतदान में पीछे नहीं रहे।शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुजुर्गों के दिल में वोट डालने को लेकर गजब का उत्साह रहा। वे खुद के पांव से चल पाने में असमर्थ जरूर हैं। मगर देश के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनकी इस चिंता को देख परिजन उन्हें गोद में उठाकर बूथ तक लाए और मतदान कराया।
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जिंदगी के आखिरी दौर में पहुंच चुकीं जाजूपुर की महराजा 104 वर्ष की महराजाइन अपने बूथ पर मतदान करने पहुंची। सुजौली के 100 दौलतराम यादव ने भी उम्र की परवाह किए बगैर अकेले बूथ पर जा कर मतदान किया। इनका उत्साह देख लोग हैरत में पड़ गए।
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