हम तो छिपते रहे, वो नजर आ गए...

City Newsसिटी न्यूज़ Updated Tue, 25 Mar 2014 05:30 AM IST
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घुइसरनाथ धाम। रविवार की शाम बाबा धाम में कवियों की पंक्तियों ने सद्भावना की बेहतरीन शाम पेश की। शिवम साहित्यिक मंच के बैनर तले होली मिलन पर आयोजित कवि सम्मेलन में जिले एवं अगल-बगल के जिलों से आए कवियों ने राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना की मजबूती का जहां संदेश दिया वहीं सामाजिक एवं राष्ट्रीय विसंगतियों पर भी जमकर प्रहार किया। कार्यक्रम में साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले विद्वानों को सारस्वत सम्मान भी प्रदान किया गया। यज्ञनारायण किशन की वाणी वंदना व प्रधानाचार्य कृपाशंकर पांडेय के संस्कृत वांगमय की मधुर स्तुतियों से कवि सम्मेलन का आगाज हुआ। नरेंद्र मिश्र निराश ने ‘पिचकारी मा भरि रंगनवा इ फगुनवा आवा ना’ से होली की हंसी ठिठोली में लोगों से जमकर ठहाके लगवाए। फतेहपुर के डॉ. अनिल निर्झर ने राम का है देश तो रहीम कहां जाएगा पढ़कर जातीय विसंगतियों को कुरेदा। नवीन सुल्तानपुरी की पंक्तियां ‘करने हम जिंदगी का बसर आ गए, हम तो छिपते रहे वो नजर आ गए’ ने कवि सम्मेलन को उंचाइयों पर पहुंचाया। अमेठी के रामबदन पथिक ने महंगाई पर गुझिया की मिठास धूमिल होने की ओर कटाक्ष किया ‘न बनी गुझिया न मनी होली है, महंगाई ने...।’ अनीश देहाती ने ‘छुलाक्षन बन गई इंदिरा आवास होली मा’ की पंक्तियों से भ्रष्टाचार का दर्द बयां किया। डॉ. निर्झर प्रतापगढ़ी ने सियासत पर कुछ यूं वार किया, ‘इनका तो एतना सीधा हम कभो नहीं देखे, इंसान का कुत्तों का चरन चूमि रहे हैं।’ डॉ. अशोक अग्रहरि की रचना भी महंगाई पर सीधा प्रहार करती नजर आई ‘सस्ती है अब जिंदगी, महंगा राशन तेल।’ डॉ. रामसमुझ अकेला, परवाना प्रतापगढ़ी, अनूप त्रिपाठी, अशोक मिश्र, प्रमोद लंठ, हरिवंश शौर्य, केसरी नंदन शुक्ल, यज्ञकुमार पांडेय, महेंद्र दादा, गुब्बारा, डॉ. क्रोधी, डॉ. दिनेश प्रताप, पवन मिश्र, डॉ. राममूर्ति मिश्र रमन, संतोष विद्रोही, सूर्यमणि सिंह मणीश व रमेशचंद्र मिश्र की भी रचनाएं ओज से भरी दिखीं। विशिष्ट वक्ता रूलर्स बार के अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने कहा कि आज के दौर में देश को खतरनाक इरादों से साहित्य का नवीन सृजन ही उबार सकता है। मंच द्वारा वर्ष 2014 के लिए प्रख्यात साहित्यकार निर्झर प्रतापगढ़ी, पूर्व प्रधानाचार्य रामनारायण शास्त्री व शिक्षक रामधनी वर्मा को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सारस्वत सम्मान प्रदान किया गया। अध्यक्षता पं. श्रीनिवास मिश्र व संचालन यज्ञनारायण किशन ने किया। स्वागत भाषण संरक्षक आचार्य प्रताप नारायण मिश्र व आभार प्रदर्शन संयोजक अखिलेश मिश्र ने किया। इस मौके पर लालबृजेश प्रताप सिंह, विकास मिश्र, शीतलाप्रसाद मिश्र, राजकुमार मिश्र, फूलचंद्र पांडेय, गिरजा शंकर मिश्र, लाल आकाश सिंह, डॉ. बीपी यादव, सुरेश मिश्र, पवन त्रिपाठी, वीरेंद्र श्रीवास्तव, बजरंग सिंह, आशुतोष मिश्र, जेपी विश्वकर्मा, कुलभूषण शुक्ल, चंद्रशेखर तिवारी, उमेश तिवारी, राजेंद्र मिश्र, आनंदप्रकाश त्रिपाठी, रोहित श्रीवास्तव थे।
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