प्रचारिका का प्रवचन सुनकर पहुंचे भक्तिधाम

Pratapgarh Updated Wed, 27 Nov 2013 05:40 AM IST
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कुंडा (ब्यूरो)। भक्तिमंदिर में पूजा के साथ प्रसाद बांट रहे महाराष्ट्र के बाबूलाल वर्ष 1993 में जगद्गुरु की प्रचारिका परिकरी दीदी का प्रवचन सुनकर मनगढ़ आए। 1994 में गुरु पूर्णिमा पर जगद्गुरु के दर्शन हुए। जगद्गुरु के प्रवचन सुनकर उनमें बदलाव आया। मांस, मदिरा, तम्बाकू, बीडी सबकुछ त्यागकर भक्तिधाम में सेवा करने लगे। सेवा, करते करते इतना सानिध्य मिला कि उन्हें कार्यालय में लगे फोन काल रिसीव करने की जिम्मेदारी दे दी गई। कुछ वर्षों तक यहां सेवा की, इसके बाद जगदगुरु का बराबर सानिध्य मिला तो मंजू दीदी ने मंदिर में पूजा एवं प्रसाद वितरण की जिम्मेदारी सौंप दी। पांच वर्षों से वह निरंतर भक्तिमंदिर में पूजन एवं प्रसाद वितरण का काम देख रहे हैं। कहते हैं कि कृपालु जी कहते थे कि कलयुग में भक्ति करते ही ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है। जगद्गुरु एक बार मंदिर में दर्शन को पहुंचे तो पूछा यह मंदिर किसका है, मैने कहा महराज जी आपका है, हम सभी तो दास हैं। इस पर हंसे और बोले 500 वर्षों पुराना हमारा तुम्हारा नाता है। आज फिर साथ आ गए हैं। महराज जी का प्रेम जिस प्रकार से मिला उसका वह वर्णन नहीं कर सकते हैं।
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