एक राइटिंग में दो फार्म पर आरक्षित टिकट नहीं

Pratapgarh Updated Tue, 26 Nov 2013 05:40 AM IST
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प्रतापगढ़। दलालों से निपटने के लिए बनाए गए नियमों के चक्कर में यात्रियों को पिसना पड़ रहा है। दो टिकट लेने में दो बार लाइन लगानी होगी। इससे ज्यादा लेने हों तो फिर कई घंटे इंतजार करना पड़ेगा। यही नहीं एक राइटिंग में भरा गए दो लोगों के फार्म भी स्वीकार नहीं होंगे।
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आरक्षण काउंटर पर टिकट फार्म भरने से पहले निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें। रेलवे ने आधे अधूरे फार्मों के साथ ही ओवर राइटिंग और एक साथ दो फार्मों पर एक लिखावट पर रोक लगा दी है। यदि इस तरह के फार्म लिए जाते हैं तो उन फार्मों पर बनाए गए टिकट के पैसे बाबुओं के खाते से काट लिए जाएंगे। इसके चलते अब बाबुओं ने ऐसे फार्मों पर टोका टाकी शुरू कर दी है। यदि एक ही लिखावट में एक से ज्यादा फार्म काउंटर पर दिया तो उसे वापस कर दिया जाएगा। यही नहीं फार्म आधा अधूरा भरा गया है तो उसे भी वापस कर दिया जाएगा। पहले फार्म में कुछ गड़बड़ी होती थी तो बाबू ठीक कर देते थे। अब यह फार्म वापस कर दिए जाते हैं। इन दिनों लंबी लाइन लगने के कारण यदि किसी का फार्म वापस हुआ तो उसे फिर से लाइन लगानी पड़ेगी। जानकारी के अभाव में यात्री अपने साथ ही दूसरे का भी टिकट निकलवाने पहुंच जाते हैं। ऐसे में उन्हें तो भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। यदि बाबू फार्म जमा भी कर लें तो उन पर विजिलेंस का भी खतरा होता है।
आरक्षण कराने के लिए लोग अमूमन पता लिखने में गलती करते हैं। नाम, उम्र तो वह सही लिखते हैं लेकिन पूरा पता नहीं लिखते। कहीं जिले का नाम तो कहीं पोस्ट गायब रहता है। ऐसे में अक्सर लोगों के फार्म वापस कर दिए जाते हैं। भीड़ होने के कारण दोबारा लाइन से होकर खिड़की तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। इसके अलावा श्रेणी लिखने में स्लीपर की जगह सेकेंड लिख दिया जाता है।
आरक्षण काउंटर पर टिकट लेने आए कम पढ़े लिखे लोग दूसरों से फार्म भरवाते हैं। इसके बाद उन्हीं के पीछे लाइन में लग भी जाते हैं। ऐसे में जब एक फार्म पर टिकट बनता है तो उसके बाद दूसरे फार्म पर वही लिखावट देखकर बाबू को पसीना आ जाता है। यदि वह यात्री को दूसरी खिड़की पर लगने को कहे तो उसे फिर से पीछे लाइन में लगना पड़ता है। इससे यात्री नाराज भी हो जाते हैं। अगर अंदर से उसका फार्म दूसरे बाबू को दे तो लाइन में लगे अन्य यात्री नाराज होते हैं। ऐसे में बाबू उसका फार्म रखकर कुछ देर उसे इंतजार करने को कहते हैं। बीच में किसी तरह से टिकट बनाया जाता है।
सीआरएस भाईलाल रजक का कहना है कि कम से कम पढ़े लिखे लोगों को तो फार्म ठीक से भरकर देना चाहिए। बाबू किसी भी तरह से यात्रियों का टिकट बनाना चाहता है लेकिन नियमों में बंधकर वह मजबूर हो जाता है। इसमें नाराज होने की जगह समझने की जरूरत है।
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