शहर बचाने को उजाड़ रहे उपवन, हवा और पानी में घुल रहा जहर

Pratapgarh Updated Tue, 26 Nov 2013 05:40 AM IST
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प्रतापगढ़। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी कल सोमवार को विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बात तो जाने दीजिए जिले में ही इसकी मानीटरिंग करने वाला कोई नहीं है। शहर को बचाने के लिए जंगल उजाड़ दिए जा रहे हैं। हर साल प्रशासन के साथ ही समाजसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए जाने वाले पौधे पता नहीं कहां गायब हो जाते हैं। उधर बाग हैं कि कम होते ही चले जा रहे हैं। हवा के साथ ही पानी प्रदूषित हो रहा है लेकिन इस तरफ किसी को ध्यान देने की फुर्सत नहीं है।
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जिले में पर्यावरण संतुलित रखने के लिए आवाज तो खूब उठती है लेकिन हाथ बंधे रहते हैं। भाषणों, रैलियों और गोष्ठियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का कार्य होता है लेकिन ऐसे मौकों पर दिखाने के लिए किसी के पास कुछ नहीं होता। जिले के हृदय को सींचती हुई निकली सई नदी का यह हाल है कि शहर का कूड़ा करकट और गंदगी ने उसे गंदा कर दिया है। वर्षों से समाजसेवियों ने लोगों का समूह बनाया। साफ सफाई के लिए कुछ दिन अभियान चला लेकिन सई को साफ नहीं किया जा सका। अब भी ऐसे प्रयास जारी हैं लेकिन सफलता कितनी है यह बेल्हादेवी घाट पर देखी जा सकती है। यही कारण है कि इस नदी की जैव विविधता नष्ट हो चुकी है। पेड़ लगाने वाले समाजसेवियों की भी कमी नहीं है। गांव-गांव जाकर पेड़ लगाए गए। प्रशासन के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक इतने पेड़ लग चुके हैं कि पूरे जिले में सिर्फ जंगल नजर आने चाहिए थे। मगर हालत यह है कि पहले से लगे बाग भी खत्म हो चुके हैं।
जिले का कूड़ा नगर पालिका उठाकर चिलबिला सई पुल के करीब फेंक देती है। इसके बाद इसमें आग लगा दी जाती है। यह कूड़ा निरंतर जलता रहता है। इसके चलते जमीन गरम होने के कारण सैकड़ों पेड़ सूख रहे हैं। बावजूद इसके इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। पेड़ लगाने वाले शायद लगे तैयार पेड़ नहीं देखना चाहते। वर्षों से चल रही इस प्रक्रिया से चिलबिला में सड़क के किनारे पेड़ों से मैदान साफ हो चुका है।
विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर पौधरोपण होता है। इसके बाद वन संरक्षण पखवारा भी चलाया जाता है। इसमें जागरूकता का संदेश देने के साथ ही जगह-जगह पौधरोपण होता है। इतना सब कुछ होने के बाद भी एक ही जगह पर हर साल पौधरोपण होता है। यह समीक्षा करने का समय लोगों के पास नहीं होता कि इस जगह पर कितने पौधे लगाए जा चुके हैं। हजारों पौधे लगाने की बजाए अगर एक भी पेड़ तैयार किया जाए तो पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाने की जरूरत न हो। प्रशासन के साथ ही एक भी समाजसेवी ऐसा कोई भूभाग नहीं दिखा पाता जहां उसने अपनी मेहनत से दूसरों के लिए बाग तैयार कर दिया हो।
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