फर्जी विद्यार्थियों को दिलाया लैपटॉप

Pratapgarh Updated Tue, 26 Nov 2013 05:40 AM IST
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प्रतापगढ़। फर्जी विद्यार्थियों को तैयार करके लैपटॉप ले लिया जा रहा है। नए महाविद्यालयों में यह खेल चुपके-चुपके किया जा रहा है। डीआईओएस के हस्ताक्षर से बनने वाले परिचय पत्र में फोटो भी बदल दी जा रही है। पैसा खर्च करने वाले अनुपस्थित छात्रों को तो लैपटॉप दिला ही दिया गया है। पढ़ाई छोड़ चुके कई छात्र भी इस साल फर्जी परिचय पत्र बनवाकर लैपटॉप ले रहे हैं।
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प्रशासन की तमाम व्यवस्थाओं और दावों के बाद भी खेल किया जा रहा है। फार्म भरने से लेकर डीआईओएस के यहां से बनने वाले परिचय पत्र में भी खेल किया गया है। ऐसे विद्यालयों में छात्र एडमीशन कराकर बाहर चले जाते हैं। बीमारी या अन्य कारणों से विद्यालयों में जो छात्र उपस्थित नहीं हो सकते। ऐसे छात्रों के स्थान पर महाविद्यालय प्रबंधन फर्जी छात्रों की फोटो लगाकर परिचय पत्र बनवा दे रहा है। वितरण के समय छात्र लैपटॉप लेकर आसानी से निकल जाता है। बाद में महाविद्यालय के लोग उससे पैसा ले लेते हैं। हालत यह है महाविद्यालयों में भारी पैमाने पर हो रहे इस गोरखधंधे की किसी को कानोकान खबर ही नहीं है। इसका खुलासा लीलापुर के जयराजि कुंवरि बाबा पारसनाथ महाविद्यालय में हुआ। बीमार छात्रा के स्थान पर दूसरी छात्रा को लैपटॉप दिला दिया गया। बाद में मामला खुलने पर नोडल अधिकारी ने उससे लैपटॉप रखवा लिया। मामला फंसते देख छात्रा भाग निकली।
जयराजि कुंवरि बाबा पारसपाल सिंह महाविद्यालय लीलापुर में रंजना व रेशमा दो बहनें बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। रंजना बीमारी के चलते गुजरात में इलाज करा रही है। उसकी बहन रेशमा शनिवार को विद्यालय में लैपटॉप लेने आई थी। विद्यालय प्रशासन ने उसकी बहन के नाम पर दूसरी छात्रा को लैपटॉप दिलाने के लिए उसकी जगह दूसरी फोटो लगाकर परिचय पत्र बनवा दिया। इसके साथ ही कुछ प्रमाणपत्रों में भी हेर फेर कर दिया। रेशमा को कहा गया कि यदि वह विरोध करेगी तो उसे लैपटॉप नहीं लेने दिया जाएगा। यही नहीं विद्यालय में फेल कराए जाने की भी धमकी दी गई। ऐन मौके पर वह रोने लगी तो नोडल अधिकारी आरपी सिंह ने उससे पूछताछ की इस पर उसने सारी हकीकत बता दी। इसके बाद जब फर्जी छात्रा से पूछताछ की जाने लगी तो वह भाग निकली।
महाविद्यालय में यदि पैसे की बात नहीं की तो कागजों में भी हेरफेर कर दिया जाएगा। नाम, पिता का नाम, गांव आदि में ही गलती कर दी जाएगी। इसके बाद इसे ठीक तभी कराया जाएगा जब विद्यालय की मर्जी के मुताबिक सुविधा शुल्क दिया जाएगा। यही नहीं यदि ज्यादा बहस के चक्कर में पड़े तो छात्र का डीआईओएस के यहां से बनने वाले परिचय पत्र को रुक जाने की बात बता दी जाएगी। इसके बाद सिफारिश लगाई तो दूसरी लिस्ट के बहाने बात टाल दी जाएगी।

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