34 वर्षों पूर्व डा. डीपी सिंह ने रखी थी कृपालु कालेज की नींव

Pratapgarh Updated Tue, 26 Nov 2013 05:40 AM IST
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कुंडा (ब्यूरो)। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के शिक्षण संस्थान की नींव 34 वर्षों पूर्व नगर के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. डीपी सिंह ने रखी थी। उनकी प्रेरणा से शुरू किए गए कालेज को डा. डीपी सिंह ने जगद्गुरु के ट्रस्ट को सात वर्ष पूर्व दान कर दिया था। वह जगद्गुरु कृपालु जी महाराज से 41 वर्षों जुड़े हैं। पहली बार जगद्गुरु डिस्पेंसरी पहुंचे तो उन्होंने बेटे की संज्ञा दी थी। वह जगद्गुरु से जुड़ी यादें बताते नहीं थक रहे हैं।
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मूल रूप से कुंडा कस्बे के निवासी डा. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने जब कुंडा में क्लीनिक डालकर इलाज की शुरुआत की तो वह कुंडा के पहले एमबीबीएस चिकित्सक थे। वह जगद्गुरु कृपालु जी महाराज से 1972 से जुड़े थे। वर्ष 1978 में कुंडा में कृपालु जूनियर हाईस्कूल की स्थापना ढाई बीघे भूमि का बैनामा कराकर किया। सरकारी चिकित्सक रही डा. मीरा सिंह के साथ सपरिवार वह हमेशा जाते रहे, लेकिन 1983 में कार्तिक पूर्णिमा की सुबह जगद्गुरु उनकी डिस्पेंसरी पर पहुंचे। डा. डीपी सिंह कहते हैं मिलते ही उन्होंने गले से लगाया और पिता से बोले यह मेरा बेटा है। आपको इससे कोई एतराज तो नहीं है। सीएमएस पद से रिटायर्ड हुईं पत्नी मीरा सिंह के साथ उन्होंने आश्रम में अस्पताल की स्थापना के पहले से ही स्वास्थ्य सेवा शुरू कर दी थी। स्कूल की स्थापना के लिए नाम पूछा तो कृपालु जी बोले मेरे नाम से खोलो, लेकिन मेरा कोई मतलब नहीं रहेगा। स्कूल में बीएड तक की शिक्षा प्रारम्भ कराई। सात वर्षों पूर्व स्कूल की व्यवस्था पर बात हुई, बोले विस्तार के लिए इसे ट्रस्ट को दान दे दो। उनकी बात सुनकर मैने तत्काल स्कूल दान कर दिया। आज भी जब वह स्कूल आते बातें होती तो बोलते यह कालेज तो धीर का बनवाया है। प्यार से उन्हें कृपालु जी धीर कहते थे। डा. डीपी सिंह कहते हैं कृपालु जी जैसा न कोई हुआ है और न होगा। वह परिपूर्ण थे, कोई कामना नहीं थी। जो भी किया जीव कल्याण के लिए किया। विश्व में उनके जैसा अस्पताल, प्रेम मंदिर कहीं नहीं है। वह आज भी हमारे अंदर हैं। उनके बीमार होने पर कृपालुजी को गोद में लेकर इलाहाबाद जा रहा था। रास्ते में ड्रिप लगा रहा था तो उनका खून लग गया, वह तो अपना खून भी हमें दे गए। सिटी स्कैन देखने के बाद ही मैं समझ गया था कि अब चाहे जहां ले जाएं कोई फायदा नहीं होने वाला है। वह कहते थे शिक्षा वही जो हमें ईश्वर प्राप्ति की ओर ले जाए। महाराज जी कवच की तरह हमारी रक्षा करते हैं।
41 वर्षों से भक्तिधाम से जुड़े कस्बे के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. डीपी सिंह कहते हैं कि जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के मन की बात कोई नहीं समझ सका। 1993 का चुनाव नजदीक था उसी दौरान बाबूगंज का मेला चल रहा था। बोले चलो मेला देखने चलते हैं। मेले में पहुंचे तो कहीं नहीं गए। गाड़ी पर बैठे-बैठे सामने देख रहे थे। राजा भैया के कार्यालय के सामने पहुंचे तो राजा भैया से मिलने गए। राजा भैया ने प्रणाम किया तो उन्हें गले से लगा लिया। गले से एक माला उतार कर उन्हें पहना दी।
जगद्गुरु कृपालु जी महाराज हमेशा ही सत्संगियों को राजनीति से दूर रहने की प्रेरणा देते थे। डा. डीपी सिंह कहते हैं कि कृपालु जी महाराज कहते थे कि आदमी नेता तो बन सकता है, लेकिन नेता मनुष्य नहीं बन सकता है। कहते थे राजनीति के जंजाल से दूर रहो, हर आने जाने वाले से भी हमेशा कहा करते थे।
जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के साथ सारी रिद्धियां, सिद्धियां साथ चलती थीं। डा. डीपी सिंह कहते हैं कि 25 वर्ष पूर्व की बात है। जगद्गुरु ने कहा श्रृंग्वेरपुर घाट चलना है। सो मैं ड्राइवर को छोड़ स्वयं ही गाड़ी लेकर चल पड़ा। मैं गाड़ी चला रहा था, महाराज जी बैठे थे। वापस लौटने में देरशाम हो गई। श्रृंग्वेरपुर भगौतीपुर के बीच गाड़ी पंचर हो गई। मैं नीचे उतरा, सोच रहा था। तभी जगद्गुरु ने पूछा गाड़ी का टायर बांध लेते हो, मैं बोला नहीं। इस पर सामान निकालने को कहकर जंगल की ओर चले गए। बीच जंगल अजूबा हुआ, एक व्यक्ति साइकिल से पहुंचा बोला अरे डाक्टर साहब गाड़ी पंचर है क्या लाओ हम ठीक कर देते हैं। महज पांच मिनट में टायर बदल दिया। महाराज जी बोले इसे पांच रुपये दे दो, उस समय पांच रुपया बहुत होता था। मैं पैसे निकलने के लिए मुड़ा तो पीछे से आदमी गायब हो गया। महाराज जी बोले देखो यहीं कहीं होगा, मुझसे जंगल में उसे ढ़ुंढवा रहे थे और स्वयं मुस्करा रहे थे। अचंभित मन से मैं खड़ा हुआ तो बोले चलो अब चला गया तो क्या करोगे। यह घटना मैें जीवन में कभी नहीं भूल सकता।
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