कार्यों की दशा पर चढ़ा कमिश्नर का पारा

Pratapgarh Updated Fri, 25 Oct 2013 05:38 AM IST
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विकास भवन सभागार में गुरुवार को मंडलायुक्त कुमार कमलेश ने विकास कार्यों की समीक्षा की। निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर कार्यदायी संस्थाओं को फटकार लगाई। नाराज कमिश्नर ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि हरहाल में निर्धारित समय पर काम पूरे होने चाहिए। उनके हर सवाल पर अफसरों की बोलती बंद रही। अनुपस्थित डीएफओ, बीएसए, मंडी सचिव के वेतन रोकने का निर्देश डीएम को दिया। कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर का निर्देश दिया।
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मंडलायुक्त ने निर्धारित समय ठीक 11.30 बजे से समीक्षा शुरू कर दी। उनकी नजर सबसे पहले सड़कों के निर्माण पर पड़ी। आरईएस, पीडब्लूडी, जलनिगम, नहर निर्माण शाखा से कार्यों के प्रगति के बारे में पूछा। दर्ज आंकड़े कार्यों की सुस्त गति की पोल खोल रहे थे। ज्यादातर सड़कें अधूरी पाई गईं। कइयों पर अब तक लेपन का कार्य तक नहीं शुरू हो सका। इस पर उनका पारा चढ़ गया। कार्यदायी संस्थाओं को उन्होंने जमकर फटकार लगाई। सेतु निगम के जरिए कराए जा रहे कार्य भी संतोषजनक नहीं मिले। निगम के जेई को फटकारते हुए कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। शहर में सड़क और सीवर निर्माण का कार्य भी धीमा पाया। बोले कि इससे खराब स्थिति कुछ हो ही नहीं सकती। आवासीय विद्यालय बना रहे आवास विकास की रिपोर्ट बेहद घटिया मिली। आसपुर देवसरा में विद्यालय के दरवाजे बेहद कमजोर, बाउंड्री मानक से छोटी, छत के टपकने जैसी बात देख मंडलायुक्त ने खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय से पूछताछ शुरू की। बीएसए की बाबत बताया गया वह जेडी की मीटिंग में गए हैं। यह सुनते ही कमिश्नर ने खंड शिक्षा अधिकारी को जमकर फटकार लगाई। कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा के मद्देनजर उन स्कूलों की सुविधा चाकचौबंद की जाए। डीएम को निर्देशित किया कि वे एसडीएम से पट्टी, शिवगढ़, गौरा सहित अन्य विद्यालयों की जांच और कार्रवाई करें। सीएमओ कार्यालय व सीएचसी, पीएचसी के निर्माण की गति भी धीमी मिली। कार्यदायी संस्था के खिलाफ लिखापढ़ी का निर्देश दिया। समीक्षा बैठक में जिला वनाधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मंडी समिति के सचिव अनुपस्थित रहे। नाराज मंडलायुक्त ने उन तीनों अफसरों का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
विकास भवन के सभागार में समीक्षा बैठक से चलते-चलते कमिश्नर ने अफसरों को सक्रियता का तगड़ा पाठ पढ़ाया। कहा कि सरकार पैसा देती है तो काम क्यों नहीं करते। हर जगह बहाना। सड़क नहीं बन रही तो बारिश के कारण, स्कूल के दरवाजे जर्जर तो पुराने अफसर जिम्मेदार, गजेहड़ा पुल नहीं बन रहा तो वन विभाग कारण। बदतर कार्यों को देख पहले से खफा कमिश्नर ने अधिकारियों से सवाल किया आखिर ऐसा क्यों? सरकार से वेतन लेने में लापरवाही नहीं करते, तो काम में लापरवाही किस लिए। कहा ऐसा नहीं चलेगा, आदत में सभी सुधार ले आएं।
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