टिकट देने में देर हुई तो फिर टूटेगी कांग्रेस

Pratapgarh Updated Tue, 22 Oct 2013 05:38 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हमेशा की तरह इस बार भी चुनाव से पहले कांग्रेस में टिकट के लिए मारामारी और गुटबाजी शुरू हो चुकी है। इलाहाबाद संसदीय सीट से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र एवं कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य अनिल शास्त्री का नाम पहले ही सामने आ चुका है और अब जिलाध्यक्ष ने टिकट के लिए दावा कर दिया है। टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसे में पार्टी के भीतर तनातनी की स्थिति पैदा हो गई है।
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कांग्रेस में टिकट के लिए गुटबाजी और तनातनी कोई नई बात नहीं है। पूर्व में हुए चुनावों के दौरान भी ऐसे ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे। किसी ने टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी तो किसी ने सीधे कांग्रेस नेतृत्व पर ही सवाल उठाए। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले फिर पुरानी स्थिति बनने लगी है। अनिल शास्त्री को ऊपर से संकेत मिल चुके हैं, सो वह इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं और लगातार सभाएं कर रहे हैं। वह पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि इसी बीच जिला कांग्रेस कमेटी की एक बैठक में इलाहाबाद सीट से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और जिलाध्यक्ष श्यामकृष्ण पांडेय के नाम पर प्रस्ताव पारित हो जाने से दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। हालांकि बैठक में मौजूद एआईसीसी के सदस्य शेखर बहुगुणा ने उसी वक्त स्पष्ट कर दिया था कि डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने सूचना भेजी है कि वह इलाहाबाद सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी, इसलिए उनके नाम का प्रस्ताव न रखा जाए लेकिन जिलाध्यक्ष अब भी टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। इस बैठक के बाद टिकट को लेकर कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है और बयानबाजी का दौर चल पड़ा है। अगर यही हालत रही तो जिला और शहर स्तर पर पार्टी फिर गुटबाजी का शिकार हो जाएगी। ऐसे में चुनाव से पूर्व की गई तमाम तैयारियों पर पानी भी फिर सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इलाहाबाद की तरफ फूलपुर सीट से भी टिकट के लिए गुटबाजी और मारामारी शुरू हो चुकी है। वहां से प्रियंका गांधी का नाम इसीलिए उछाला गया ताकि टिकट के तमाम दावेदारों की जुबान पर ताला लग जाए। यह अचानक नहीं हुआ बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया। प्रियंका का नाम सामने आने पर तमाम नेताओं की बोलती बंद हो गई तो वहीं कुछ नेताओं ने इस मौके पर फायदा उठाकर दिल्ली तक जोर लगा दिया है। ऐसी स्थिति में टिकट तय करने में जितनी देर होगी, दावेदारों की संख्या भी उतनी ही बढ़ेगी। ऐसा हुआ तो गुटबाजी और तनातनी भी बढ़ेगी। पिछले चुनाव में ऐसी स्थिति पैदा होने पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।
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