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अमौसा नहायल चलल गांव देखा...

Pratapgarh Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। महाकुंभ के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर पुण्य सलिला गंगा में आस्था की डुबकी लगाने को जिले के हजारों लोग प्रयाग रवाना हुए। रोडवेज बस अड्डे से लेकर रेलवे स्टेशन तक लोगों की भीड़ ही भीड़ नजर आई। यही नहीं लोगों का रेला इस कदर रहा कि चौराहों पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उनकी लाइन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। शुक्रवार दोपहर बाद से शुरू हुआ यह सिलसिला शनिवार देर रात तक जारी रहा।
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मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर ही महाकुंभ का मेला दिखाई पड़ा। लोगों की भीड़ इतनी अधिक रही कि रेलवे स्टेशन से बस अड्डे तक लोगों की लाइन लगी रही। स्टेशन पर मेला स्पेशल के इंतजार में बैठे लोगों को यह ट्रेनें पूरी तरह से भरी मिलीं। पूरे दिन यात्रियों का रेला शहर की सड़कों पर लग रहा। बसों से उतरकर लोग रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़े तो चौराहों पर जाम की स्थिति हो गई। ऐसा लग रहा था कि कुंभ मेला प्रतापगढ़ में ही लग गया है। गांव के लोग हाथों और सिर पर बड़े-बड़े झोले तथा बोरे उठाए जल्दी-जल्दी स्टेशन पहुंच जाना चाहते थे लेकिन उनकी लाइन थी कि लंबी ही होती जा रही थी। ऐसे में चौराहों पर खड़े पुलिस वाले वाहनों को निकालने के लिए भीड़ को थोड़ी-थोड़ी देर के लिए रोक भी लेते थे। बस स्टेशन पर यात्री खाली बसों का इंतजार करते रहे। जैसे ही इलाहाबाद से कोई बस आती तुरंत यात्री उसमें अपनी जगह सुरक्षित करने पहुंच जाते। बस स्टेशन के कर्मचारियों में भी अफरातफरी का माहौल रहा। चालक और परिचालक के गाड़ी खड़ी करते ही वे फुल हो जाती थीं। एआरएम दीपक चौधरी ने शुक्रवार शाम से शनिवार दोपहर तक रोडवेज की बसों से 40 हजार यात्रियों को कुंभ भेजने का दावा किया है। उधर रेलवे स्टेशन पर शनिवार 12 बजे तक इलाहाबाद के लिए मात्र 1200 टिकटों की ही बिक्री हुई थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ज्यादातर लोग बिना टिकट ही ट्रेनों पर सवार हो गए।

यात्रियों को मेला स्पेशल ट्रेन पकड़ने के लिए धक्का-मुक्की करनी पड़ी। यही नहीं कई बार यात्री प्लेटफार्म पर गिरे लेकिन आस्था का ज्वार ऐसा कि वे तत्काल उठकर दोबारा ट्रेन पर चढ़ने का प्रयास करते थे। कई बार ऐसा हुआ कि भीड़ की अधिकता को देखते हुए अंदर रहे यात्रियों ने दरवाजे ही बंद कर लिए। इससे यात्री ट्रेन का दरवाजा पीटते नजर आए। ट्रेनों के प्लेटफार्म की गलत जानकारी देने से भी यात्री इधर-उधर भागते रहे। प्लेटफार्म के दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर कुछ लोगों ने ट्रेन पकड़ी।
आस्था की झलक ट्रेनों के अंदर भी देखने को मिली। फैजाबाद से सवा तीन बजे जंक्शन पहुंची मेला स्पेशल में महिलाओं के कई समूह मंगल गीत गा रहे थे। ढोल की थाप और मंजीरे की झंकार के बीच मंगल गीत और लोकगीतों के साथ ही गंगा गीत भी सुनाई देते रहे। हे गंगा माई तोहे चुनरी चढ़उबे..., भला करिहैं गंगा माई, शिव सुंदरी के वेग कल-कल.. जैसे गीतों से कूपे गुलजार रहे। ट्रेन के कई कूपों में महिलाएं अपनी शैली में गीत गाती रहीं। महाकुंभ स्नान को जा रहे अन्य यात्री भी उनके गीतों से आह्लादित थे।
इनसेट
‘गंगा माई सब भला करिहैं’
प्रतापगढ़। परिजनों से जिद करके गंगा स्नान को जा रही नई बहुरिया भी स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करती दिखी। पैरों में बजती पायल और नेट वाली साड़ी से घूंघट में चेहरा छुपाने का असफल प्रयास करती बहुरिया परिजनों की डांट का शिकार भी हो रही थी। परिजन भारी भीड़ देख कह रहे थे कि यह तो बिना मतलब जिद करके चली आई। इतनी भीड़ है कि प्रयाग पहुंचा भी जा सकेगा या नहीं। ससुर के साथ ही सास और पति भी उसकी जिद पर ताने दे रहे थे। काफी देर उनकी बात सुनने के बाद बहू ने कहा, ‘गंगा माई सब भला करिहैं।’
इनसेट
बवाल में टूटी खिड़कियां
प्रतापगढ़। मौनी अमावस्या के चलते मेला स्पेशल में भारी भीड़ हो रही है। शनिवार को फैजाबाद में सेना की भर्ती थी। भर्ती के बाद अभ्यर्थी वहां से निकले तो उन्हें मेला स्पेशल ट्रेन ही मिल पाई। इसमें भारी भीड़ होने के कारण वे सीट नहीं पा सके। इसके चलते उन्होंने ट्रेन में खूब उपद्रव किया। प्रतापगढ़-फैजाबाद के बीच में उन्होंने बाथरूम की हालत बिगाड़ दी। यही नहीं खिड़कियों के शीशे तोड़ने के साथ ही अन्य जगहों पर भी तोड़फोड़ की गई। इस दौरान हुए बवाल में मेला जाने वाले यात्री डरे सहमे बैठे रहे।
इनसेट
बिना टिकट की कुंभ की यात्रा
प्रतापगढ़। रेलवे स्टेशन से कुंभ स्नान को जाने वाले यात्री बिना टिकट के ही कुंभ रवाना हो जा रहे हैं। स्टेशन पर जनरल टिकट बनाने के लिए दो काउंटर चलते थे। मेले को देखते हुए तीनों काउंटर चला दिए गए हैं। बावजूद इसके मेलार्थी लाइन में लगकर टिकट लेेने का झंझट नहीं उठा रहे थे। वे सीधे स्टेशन पर पहुंचते हैं और ट्रेनों को पकड़कर प्रयाग के लिए रवाना हो जाते हैं। इनको चेक करने के लिए न रेलवे के पास स्टाफ ही नहीं है।
इनसेट
सरयू एक्सप्रेस में हुई मारपीट
प्रतापगढ़। सुबह साढ़े आठ बजे सरयू एक्सप्रेस आई तो कुंभ स्नान को जाने वाले यात्री दौड़ पड़े। मगर यह क्या यह तो पहले से ही भरी हुई थी। इसके साथ ही कई कूपे के दरवाजे बंद मिले। इससे यात्री दरवाजे पीटने लगे। लोगों की भीड़ और दरवाजे पर पड़ने वाली चोट के कारण अंदर बैठे यात्रियों ने दरवाजा खोला तो गाली गलौज होने लगी। यही नहीं गाली गलौज के साथ ही कुछ लोगों में मारपीट शुरू हो गई। कुछ लोगों ने बीच बचाव किया तो मामला शांत हो सका।
इनसेट
टिकट काउंटर पर हंगामा
प्रतापगढ़। टिकट काउंटर पर शनिवार को लंबी लाइन लगी हुई थी। तीनों काउंटर खोले जाने के बावजूद लोगों की भीड़ छंटती नजर नहीं आ रही थी। इससे यात्री खफा हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। इस पर आरपीएफ के सिपाहियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। बाद में स्थिति सामान्य होने पर एक सिपाही की वहां तैनाती की गई। बावजूद इसके यात्री हो हल्ला मचाते रहे। रोकने पर यात्री सिपाही से भी भिड़ने को तैयार हो जा रहे थे।
इनसेट
अंतिम क्षणों में स्टेशन चमकाने की कवायद
प्रतापगढ़। कुंभ मेले का प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या को माना गया है। इसके बाद मेला तो रहता है लेकिन भीड़ कम होने लगती है। इसके बाद बसंत पंचमी मेला समाप्ति माना जाता है। मौनी अमावस्या का मेला हो गया और पांच दिन बाद बसंत पंचमी भी होगी। यानी मेला बीतने को हुआ तो रेल विभाग को स्टेशन के संकेतक ठीक करने की याद आई है। शुक्रवार से रेलवे स्टेशन के संकेतक फिर से पेंट किए जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में पार्किंग के साथ ही अन्य जगहों पर पेंट करके मेलार्थियों को संकेत के माध्यम से सारी बातें समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
इनसेट
जगमग नहीं हो सका स्टेशन का मुख्य द्वार
प्रतापगढ़। रेलवे स्टेशन ने महाकुंभ को लेकर कोई भी उत्साह नहीं दिखाया है। यही नहीं उसे अपने यात्रियों की भी कोई परवाह नहीं है। स्टेशन परिसर में अभी भी रात में अंधेरा रहता है। ऐसा नहीं है कि कहीं लाइट नहीं लगी है। मुख्य द्वार के आसपास चार सोडियम लाइट लगी हुई है। एक वाहन स्टैंड के पास भी लगी हुई। बावजूद इसके वाहन स्टैंड की लाइट ही जलती है। बाकी लाइटों में फ्यूज बल्ब ही नहीं बदले गए हैं। यही नहीं स्टेशन पर भी मेला स्पेशल कुंभ से लौटती है तो उसकी रैक स्टेशन के दूसरे छोर तक लगती है। लाइट सिर्फ शेडों में ही जलती है। इसके बाद अंधेरा ही रहता है। इस बारे में न तो पहले ही रेलवे ने सोचा और न ही अब सोच रहा है।

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