फर्जीवाडे़ ने अनुदान पर लगाया ब्रेक

Pratapgarh Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। पंपिंगसेट लगाने के लिए मिलने वाले दस हजार रुपये अनुदान की राशि हड़पने के लिए लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। फर्जी नाम और फर्जी रसीद लगाकर अनुदान की राशि हड़पने वालों के मंसूबों पर सत्यापन ने पानी फेर दिया है। फर्जीवाडे़ का खुलासा होने से पात्र लाभार्थी भी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
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किसानों को सिंचाई का प्रोत्साहन देेने के लिए कृषि विभाग पंपिंगसेट लगाने पर दस हजार रुपये अनुदान देता है। जिले के किसानों से अनुदान प्राप्त करने के लिए आवेदन मांगे गए थे। विभाग में प्राप्त आवेदन पत्रों का जब सत्यापन शुरू हुआ तो अधिकांश फर्जी पाए गए। कर्मचारियों के सत्यापन में जो तथ्य उजागर हुए उससे विभागीय अधिकारी हैरत में हैं। आवेदन पत्र में जो पता दिया गया था उस नाम का व्यक्ति पूरे गांव में खोजने पर नहीं मिला। कुछ लोगों ने पुराने सबमर्सिबल को नया दिखाकर फर्जी रसीद लगा दी थी। दुकानों से सत्यापन के बाद उनकी पोल खुल गई। विभागीय अधिकारियों की बातों पर गौर करें तो 204 आवेदकों में 67 आवेदनपत्र सत्यापन में फर्जी पाए गए। विभाग की इस पहल से वास्तविक लाभार्थी भी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।

विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में 379 किसानों को अनुदान देने का लक्ष्य रखा है। मगर अभी तक अधिकांश आवेदनपत्रों के फर्जी निकलने के कारण वास्तविक लाभार्थियों की राह में कांटे खड़े हो गए हैं। अधिकारियों ने अनुदान का लाभ लेने वाले किसानों को सत्यापन के बाद ही धनराशि का भुगतान करने का फैसला किया है। इस वर्ष किसानों को चेक नहीं बल्कि आनलाइन खाते में धनराशि भेजी जाएगी। उपकृषि निदेशक विजय सिंह ने बताया कि फर्जीवाडे़ को रोकने के लिए सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने पात्र किसानों को आनलाइन भुगतान की बात कही है।
शिवगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अवधापुर में वर्ष 2008-09 में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए दो लाख एक हजार रुपये भवन प्रभारी को मिले थे। तीन वर्ष बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ और रुपये निकाल बंदरबांट कर लिए गए। गांव के चंद्रभान पटेल ने बीएसए से शिकायत की। अधिकारियों की फटकार के बाद भी अतिरिक्त कक्ष का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार मिश्र ने जांचकर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
शासन ने सौ हेक्टेअर भूमि की स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए मंजूरी दे दी है। शीघ्र ही उद्यान विभाग को पाइपें, क्लैंप व स्प्रिंकलर (फौव्वारा) मिल जाएगा। इसके लिए विभाग ने किसानों से आवेदन भी मांग लिए हैं।
सब्जी की खेती की सिंचाई के लिए मुफीद मानी जाने वाली स्प्रिंकलर विधि का सौ किसानों को लाभ मिलेगा। एक हेक्टेअर से ज्यादा सब्जी की खेती करने वाले किसान इसका फायदा उठा सकेंगे। इसमें 3 इंच मोटी पाइप लेने वाले को 25 व 2.5 इंच मोटी पाइप लेने वाले को 30 पाइपेें दी जाएंगी। इसके साथ ही क्लैंप व स्प्रिंकलर भी दिए जाएंगे। विभाग ने किसानों से इसके लिए आवेदन भी मांग लिए है। यहां बताना जरूरी है कि स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करने पर पानी पौधे के पत्तों से होते हुए जड़ तक पहुंचता है। इससे पानी की बरबादी भी नहीं होती। शासन ने 100 हेक्टेअर का लक्ष्य विभाग को दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई है। फरवरी में यह सामान भी विभाग को प्राप्त हो जाएंगे।

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