फांसी पर लटकता मिला डाक्टर का शव

Pratapgarh Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
गड़वारा / संडवाचंद्रिका। अंतू थाना क्षेत्र के किसुनगंज बाजार में निजी दवाखाना चलाने वाले चिकित्सक का शव मंगलवार सुबह बांस की कोठ में संदिग्ध हालात में फांसी पर लटकता मिला। वह सोमवार शाम छह बजे टहलने के लिए निकले थे। काफी देर तक नहीं लौटने पर परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ग्रामीण हत्या का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस आत्महत्या बता रही है।
अंतू इलाके के ही टिकई का पुरवा मवैया गांव निवासी डॉ. ओमप्रकाश पांडेय (45) ने किसुनगंज बाजार में निजी भवन में दवाखाना खोल रखा था। कोई साढे़ तीन माह पूर्व किसुनगंज बाजार के पास ही उनके बड़े बेटे विनोद (22) की हत्या कर दी गई थी। तब से वह काफी परेशान रहने लगे थे। हत्या का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। सोमवार शाम ओम प्रकाश दवाखाने से घर आए। करीब छह बजे चाय पीने के बाद टहलने निकले तो लौटकर नहीं आए। करीब आठ बजे परिजन उनकी तलाश करने लगे। साढे़ 8 बजे तक कहीं पता नहीं चलने पर अंतू थाने को उनके गायब होने की सूचना दी गई। तीन माह पहले बेटे की हत्या के बाद चिकित्सक के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस परेशान हो उठी। एसओ सीबी यादव के साथ ही सीओ सिटी शिवाजी शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और खोजबीन में जुट गए। रात दो बजे पुलिस निराश होकर लौट गई। सुबह घर से कुछ दूर स्थित बांस की कोठ में उनका शव संदिग्ध हालात में लटकता मिला। एक पैर जमीन पर टिका होने के कारण ग्रामीण हत्या की आशंका जताने लगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने से मौत की पुष्टि हुई है। सीओ सिटी ने बताया कि परिवार के लोग हत्या नहीं बता रहे थे। गला खिंचने के कारण पैर जमीन पर छू गया होगा। कुछ लोग आशंका जता रहे थे लेकिन मामला हत्या का नहीं है।
डा. ओम प्रकाश की आत्महत्या उनके बेटे की हत्या से सीधे जुड़ी है। परिजन दबी जुबान से इसे स्वीकार कर रहे हैं। बेटे की हत्या की बाबत पूछताछ करने के लिए पुलिस ने कई बार उन्हें बुलाया था। पुलिस का मानना है कि वह हत्यारों को पहचानते थे, लेकिन बोल नहीं रहे थे। इस बीच पुलिस ने दबाव बढ़ाया तो वह परेशान रहने लगे। उनके बेटे ने भी बताया कि पुलिस के दबाव से वह परेशान रहने लगे थे। बेटे के हत्यारोपियाें के नाम का खुलासा न होने से वह आहत रहे हाें या फिर पुलिस से परेशान रहे हों, उनकी आत्महत्या सीधे बेटे की हत्या से जोड़कर देखी जा रही है।
डा. ओम प्रकाश पांडेय ने अपने बेटे विनोद के हत्याराें को देखा था लेकिन वह उनकी पहचान नहीं कर सके थे। हरियाणा से बी-फार्मा कर रहा विनोद घर आया था और 29 सितंबर की शाम वह दुकान से पिता के साथ घर आने को तैयार हुआ। इसी दौरान किसी दोस्त के साथ बाइक से संडवाचंद्रिका की ओर गया। पिता ने उसका पीछा भी किया लेकिन कार खराब होने के कारण लौट गए। देर रात कोल बजरडीह गांव के पास एक बाग में उसका शव पाया गया। पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई लेकिन पौने तीन माह का समय बीतने के बाद भी पुलिस हत्याराें तक नहीं पहुंच सकी।
डा. ओमप्रकाश पांडेय की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया। पौने तीन माह पूर्व बड़े बेटे की हत्या के बाद खुद डाक्टर के चले जाने से आसपास के लोग भी व्यथित हो गए। छोटा पुत्र विवेक, बेटी और पत्नी को लोग संभालते रहे।

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