जंक्शन का पानी तो पहुंचा देगा अस्पताल

Pratapgarh Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
प्रतापगढ़। जंक्शन प्रतापगढ़ जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। जिले के लोग कहीं जाने के लिए यहीं से ट्रेन पकड़ते हैं। कुंभ के मुख्य स्नान पर्वों पर भी यहीं से अधिकांश लोग प्रयाग की यात्रा करेंगे। यहां की समस्याओं पर नजर डालें तो रेलवे स्टेशन कम समस्याओं का घर ज्यादा नजर आता है। स्टेशन के मुख्य अधिकारियों के चेंबर के सामने तो थोड़ी बहुत साफ सफाई नजर आती है लेकिन इसके बाद यहां लोगों के खड़े होने लायक जगह नहीं रहती। गंदगी और बदबू से लड़ते इस रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म भी टूटे हुए हैं। प्लेटफार्म पर गड्ढे हैं तो जगह-जगह ईंट पत्थर भी फैले पड़े हैं। यहां लगा टिनशेड भी टूटा है। इससे कोहरे और ओस की बूूंदें यात्रियों के सिर पर ही गिरेंगी। यात्री ठंड की चपेट में आ सकते हैं। पानी की समस्या भी यहां विकराल है। वर्षों से देख-रेख के अभाव में टोटियों में जंग लग गया है। लोहे की टोटियां लाल रंग की हो चुकी हैं और पानी में जंग के कण गिरते रहते हैं। यह पानी पीकर लोग बीमारी की चपेट में आकर गंगा स्नान की जगह अस्पताल पहुंच जाएंगे। शौचालय की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। भारी संख्या में लोगों के जुटने पर स्टेशन पर शौच जाने के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ेगा। जर्जर फुटओवर ब्रिज पर चलना खतरे से खाली नहीं है। इसमें लगी लकड़ी की पल्लियां सड़ चुकी हैं। बावजूद इसके इस तरफ विभाग के लोगों का ध्यान नहीं है।
कुंभ के स्नान पर्वों पर भारी भीड़ स्टेशनों पर हो सकती है। ऐसे में आतंकी खतरों से बचने के लिए प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाया गया है। कई ऐसे मौके आए जब पुलिस ने पूरा स्टेशन चेक किया। बावजूद इसके प्रतिबंधित सामान स्टेशन पर पहुंच गए। कारण मेटल डिटेक्टर का खराब होना है। इसके बावजूद उसे ठीक कराने की कोशिश नहीं की गई। कुंभ की भीड़ के रेले में छुपकर यदि कोई अराजकतत्व प्रतिबंधित सामान के साथ स्टेशन के भीतर दाखिल हो जाए तो आश्चर्य न होगा। ऐसी स्थिति में रेलवे पुलिस भी कुछ कर पाने में सक्षम नहीं दिखती। लोगों की सहायता के लिए बनाए गए यात्री सहायता केंद्र पर एक भी सिपाही मौजूद नहीं रहता।
विकलांगों के लिए बने रैंप का इस्तेमाल बिना टिकट वाले भागने के लिए करते हैं। यहां सुरक्षा के नाम पर एक सिपाही नजर नहीं आता। जीआरपी थाना होने के बावजूद सिपाहियों के दर्शन कम ही होते हैं। अगर होते भी हैं तो वह सिर्फ वसूली के लिए। ऐसे में इस रैंप का इस्तेमाल लोग अवैध सामान लाने और ले जाने तथा बिना टिकट वाले करते हैं।

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