जिला जेल में सजायाफ्ता कैदी की मौत

Pratapgarh Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
प्रतापगढ़। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी गुरुवार को मौत हो गई। उसे कोई बीमारी नहीं थी। अचानक मौत होने से जेल अधिकारी सकते में आ गए। डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
नगर कोतवाली के ही मघई का पुरवा हुड़हा गांव निवासी मकबूल हुसैन (54), उसके भाई मम्मुल हुसैन सहित पांच लोगाें को कोई 22 साल पूर्व हुई पड़ोस के बच्चू की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अन्य लोग हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर रिहा हो गए थे लेकिन मकबूल और उसका भाई मम्मुल जेल में ही बंद थे। दोनों को बैरक नंबर 10 में रखा गया था। मकबूल काफी स्वस्थ था। तीन दिन पूर्व मकबूल की पत्नी मैमुलनिशा उससे मिलने जेल गई थी। गुरुवार सुबह करीब पांच बजे वह उठा तो सीने में दर्द होने लगा। उसने भाई मम्मुल को बताया तो कुछ और बंदी उसकी मालिश करने लगे। मगर अचानक वह गिर पड़ा और बेहोश हो गया। बैरक के बंदियाें ने घटना की सूचना जेल प्रशासन को दी। जेल अधीक्षक सहित अन्य लोग मौके पर पहुंचे। जेल के डाक्टर को भी बुलाया गया और आनन फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। जानकारी मिलते ही शहर कोतवाल अस्पताल पहुंचे और बंदी के घर पर सूचना भेजी। कुछ ही देर में परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए। कुछ लोगों ने जिला जेल जाकर बैरक में बंद दूसरे भाई से भी बातचीत की। भाई के भी कोई संदिग्ध जानकारी न देने पर लोग फिर से शव के पास पहुंचे और पोस्टमार्टम कराने की कार्रवाई करने लगे। मकबूल का बड़ा बेटा मुंबई में रहता है जबकि छोटा बेटा दिलशाद अस्पताल पहुंचा था।
जिला जेल में कैदी मकबूल की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो सका। मजिस्ट्रेट के निर्देश पर दो चिकित्सकों डा. सुरेश चंद्रा व डा. अरविंद वर्मा के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। मौत का कारण स्पष्ट न होने की दशा में विसरा सुरक्षित रख दिया गया। जानकारों का मानना है कि कैदी की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।
जेल अधीक्षक विजय सिंह के अनुसार कैदी मकबूल को सुबह अचानक सदमा लग गया। उसकी हालत बिगड़ते पर भाई ने जेल प्रशासन को सूचना दी। आनन फानन में डाक्टर को बुलाकर उसे जिला अस्पताल भेजा गया। ऐसा लगता है किसी सदमे के चलते उसे दिल का दौरा पड़ा, जिससे मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार हत्या में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी लेकिन तीन आरोपियों तजम्मुल, जब्बार व लाला को जमानत मिल गई थी। मकबूल और उसके भाई मम्मुल हुसेन को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिल सकी थी। उसके बेटे दिलशाद ने बताया कि जमानत खारिज होने के बाद से वह परेशान रहने लगे थे।

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