मनरेगा का मानक शौचालय निर्माण में रोड़ा

Pratapgarh Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
प्रतापगढ़। समग्र गांवों में शौचालय निर्माण की राह आसान नहीं है। मनरेगा के धन ने अफसरों की धड़कनों को तेज कर दिया है। वजह यह है कि मनरेगा नियम में 60-40 का मानक है। यह मानक शौचालय निर्माण में पूरा नहीं होगा। अफसर अब तक इस समस्या का हल नहीं निकल सके हैं। यदि गुत्थी सुलझाए बगैर काम शुरू कराया तो आडिट में फंसना तय है।
शासन के निर्देश पर जिले में 28 लोहिया समग्र गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों की सूची शासन को भेज दी गई है। गांव की लिस्ट पाने के बाद सरकार ने यहां विकास की फाइल तैयार करने का निर्देश दिया। इन गांवों में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से शौचालय निर्माण की रिपोर्ट बनी। दर्शाया गया कि कुल समग्र गांवों में पांच हजार 752 शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। शौचालय निर्माण का बजट इस बार शासन ने बढ़ा दिया है। इस पर गौर करें तो चयनित पात्र को चार हजार 600 रुपये पंचायतीराज विभाग देगा जबकि चार हजार 500 रुपए मनरेगा से दिए जाएंगे। इतना ही नहीं 900 रुपए लाभार्थी को अपनी तरफ से लगाना पड़ेगा। इस तरह प्रति शौचालय पर 10 हजार रुपए खर्च होंगे। मनरेगा का मानक शौचालय निर्माण में अड़ंगा लगाने को तैयार है। नियम है कि मनरेगा के पैसे को 60 प्रतिशत मजदूरी पर और 40 प्रतिशत सामग्री पर खर्च किया जाएगा। शौचालय निर्माण के लिए मनरेगा से दिए जाने वाले चार हजार 500 रुपए में 60 प्रतिशत धन मजदूरी पर खर्च होगा। बाकी सामग्री खरीद में लगेगा। यदि ऐसा हुआ तो अफसरों का मानना है कि शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो सकता। यह बात शीर्ष अफसरों की समीक्षा बैठकों में कई बार मातहत अधिकारी उठा चुके हैं। स्थिति से निपटने के लिए अफसरों ने दिमाग खपाने के बाद एक शार्टकट तरीका खोजा है। यह स्थितियां अपनाई गईं तो जानकार बताते हैं कि मनरेगा आडिट में झाम फंस सकता है।
शौचालय निर्माण में नरेगा का अनुपात पूरा करने की जिम्मेदारी अन्य परियोजनाओं खास कर बीडीओ को दिए जाने की उम्मीद है। शौचालय के लिए मनरेगा से मिले धन से सामग्री खरीदेंगे जबकि मजदूरी का पैसा मनरेगा के कहीं और काम में दिखाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि इसी बात को अफसर फाइनल मान कर चल रहे हैं। मतलब यह हुआ कि जाब कार्डधारक काम करेंगे शौचालय में और मजदूरी मिलेगी सड़क, नहर, और समतलीकरण जैसे कार्यों से। आडिट टीम अगर इसे गंभीरता से लेगी तो बीडीओ की गर्दन फंस सकती है।
परियोजना निदेशक एसएन चौधरी का ककहना है कि शौचालय में मनरेगा अनुपात का मेेन्टेन हो पाना मुश्किल है। इसके लिए तरीका तलाशा जा रहा है। यही एक चारा है कि अन्य परियोजनाओं से अनुपात पूरा किया जाए। चूंकि काम विकास का ही हो रहा है। ऐसे में आडिट में भी दिक्कतें नहीं होनी चाहिए।

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