दवा के रिएक्शन से दर्जन भर एड्स रोगी बेहाल

Pratapgarh Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। एड्स पीड़ितों को दी जा रही दवा के रिएक्शन से मरीज परेशान हैं। रोगियों के बदन व चेहरे पर छालेनुमा दाने उभर आ रहे हैं। इलाज के बाद भी ऐसे मरीजों को राहत नहीं मिल रही।
एड्स रोगियों का उपचार करने के लिए जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर स्थापित है। यहां पर प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी के एड्स पीड़ितों का इलाज किया जाता है। रोगियों को दो तरह की दवाएं ‘नेब्रापिन’ और ‘इफाब्रिन’ दी जाती हैं। इनमें से ‘नेब्रापिन’ दवा के रिएक्शन से दर्जन भर मरीज परेशान हैं। उनके बदन पर छालेनुमा बड़े-बड़े दाने उभर आए हैं। वे इलाज के लिए परेशान हैं। विभाग का मानना है कि ‘नेब्रापिन’ सभी मरीजों को सूट नहीं करती। जिसे वह रिएक्शन करती है उसकी दवाएं बदल दी जाती हैं। डाक्टर रिएक्शन की वजह मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होना मानते हैं। दावा है कि जिसे वह दवा रिएक्ट करती है वह ठीक हो जाता है, लेकिन इसमें कुछ वक्त लगता है। एआरटी सेंटर की रिपोर्ट पर गौर करें तो सितंबर तक कुल 1073 एचआईवी पीड़ित पाए गए। इनमें से 844 लोग एड्स से ग्रसित मिले हैं। जिनका इलाज चल रहा है। सेंटर के रिकार्ड में 28 बच्चे भी एड्स से पीड़ित मिले हैं। उन्हें भी दवाएं दी जा रही हैं। एड्स पीड़ितों के हित काम कर रही पीएनपी संस्था के विनोद यादव दवा रिएक्ट के मरीजों को लेकर इन दिनों खासे परेशान हैं। वह उनके इलाज के लिए प्रशासन से गुहार लगाते फिर रहे हैं। दवा रिएक्शन से परेशान मानधाता के मलेहू गांव निवासी एक पीड़ित को लेकर उन्होंने सीएमओ डा. वीके पांडेय से मिल कर दवा न मिलने की शिकायत भी की है।
एआरटी सेंटर के परामर्शदाता अनिल तिवारी की मानें तो एड्स और एचआईवी में बड़ा अंतर हैं। एचआईवी (ह्यूमन इमीनोडिफिसिएंटी वाइरस) यानी कीटाणु हैं। यह शरीर में प्रवेश करने के बाद प्रतिरोधक क्षमता मार देते हैं। धीरे-धीरे पीड़ितों में रोग से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और वह अन्य बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। जिसके अंदर यह वाइरस पूरी तरह पांव पसार लेता है उसी को एड्स पीड़ित की संज्ञा दी जाती है। ऐसे रोगियों में दूसरी बीमारियों को ठीक कर पाना मुश्किल हो जाता है।
जिला अस्पताल के एसएमओ एआरटी सेंटर के डॉ. राकेश त्रिपाठी के मुताबिक यह बात सही है कि ‘नेब्रापिन’ सभी रोगियों को सूट नहीं करती। जिसमें इसका रिएक्ट होता है उसकी दवा बदल दी जाती है। ऐसे रोगियों को चाहिए कि वे बेहिचक एआरटी सेंटर पहुंच समस्या बताएं। थोड़ा वक्त लगता है दाने ठीक हो जाते हैं।

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