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जर्जर सड़कें तोड़ रहीं शरीर का ‘शॉकर’

Pratapgarh Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। जर्जर सड़कों पर बाइक दौड़ा रहे लोगों में घातक बीमारियां जन्म ले रही हैं। सबसे खराब स्थिति शहर की है। अधिकांश सड़कें जेसीबी मशीन से उखाड़ दी गई हैं। कई महीने बीत गए अब तक सड़कों को बनाया नहीं जा सका। ऊबड़-खाबड़ सड़कें हड्डियों की सेहत बिगाड़ रही हैं। नगर में मोटर साइकिल से चलने वालों की हालत बेहद खराब है। हड्डी दर्द से कराहने वाले मरीजों की संख्या अस्पतालों में खूब बढ़ी है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन ढाई से तीन सौ मरीज हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज दर्द से कराह रहे हैं। पीड़ितों में ऐसे लोग ज्यादा हैं बाइक की सवारी करते हैं। डाक्टरों की मानें तो करीब दो माह से इस तरह के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। शहर की अधिकांश सड़कें उखड़ी हुई हैं। उन पर रोजाना हजारों लोग तेज रफ्तार से मोटर साइकिल के जरिए सफर कर रहे हैं। ऐसी दशा में उखड़ी सड़कों पर बाइक के जम्प करने से हड्डियों पर असर पड़ रहा है। सबसे अधिक रीढ़ की हड्डी (शरीर का शॉकर) प्रभावित हो रहा है। इसी झटके की वजह से गर्दन के पास, पीठ के ऊपरी हिस्से में भी दर्द की शिकायतें खूब बढ़ी हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति इन सड़कों पर लगातार चलने वालों की है। हड्डियों में रैच (खिंचाव) वाले रोगी भी बढ़ रहे हैं। हड्डियां झटका लगने के कारण जर्क की शिकार हो रही हैं।

झटके का असर मांसपेशियों यानी मसल्स पर भी खूब पड़ रहा है। मांसपेशियों में भी दर्द की शिकायतें बढ़ी हैं। बांह और जंघों में उठ रही असहनीय पीड़ा भी झटके की देन मानी जा रही है। कहा जा सकता है कि ऐसी सड़कों से सफर में मांसपेशियां रोज जंग लड़ रही हैं। चूंकि इस तरह के रोग में प्लास्टर आदि का मतलब नहीं। लिहाजा डाक्टर सेंकाई और कम बाइकिंग की सलाह दे रहे हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि आजकल बाइक की जो डिजाइन बन रही है, उससे मांसपेशियां तनाव में रहती हैं। ऐसे में खड्डयुक्त सड़कों पर तेज रफ्तार बाइक के झटकेका असर सीधे मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़ता है। इससे मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं। मांसपेशियों में भी खिंचाव की स्थिति पैदा हो जाती है।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके शर्मा का कहना है कि इधर बीच दो माह से हड्डी और मांसपेशियों में दर्द के रोगी काफी बढ़े हैं। उपचार के साथ उन्हें सलाह भी दी जा रही है। प्रतिदिन ढाई से तीन सौ मरीज आते हैं। उनमें से अधिकांश ऐसे रोग के शिकार होते हैं। सतर्कता ही इस समस्या का सही इलाज है।

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