चलाकपुर समिति में त्रआठ लाख का ‘खाद’ घोटाला!

Pratapgarh Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। सहकारी समितियों में किसानों के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। चलाकपुर समिति में आठ लाख रुपये की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। इसमें तीन लाख रुपये ब्याज की रकम भी जुड़ी है। किसानों को बांटने के लिए दी गई खाद कहां गई किसी को पता नहीं। समिति से खाद तो गायब हो गई मगर उसका पैसा विभाग में जमा नहीं हो सका। इसके बाद भी अफसर अब तक सचिव या समिति पर कोई कार्रवाई नहीं कर सके। इस घपले का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
जिला सहकारी बैंक की शाखा से संबद्ध दीवानगंज समिति चलाकपुर को पांच लाख 29 हजार रुपए की खाद दी गई थी। यह खाद किसानों को बेची जानी थी। बिक्री से प्राप्त रकम को बैंक में जमा करने के आदेश थे। मगर ऐसा नहीं हो सका। सूत्र बताते हैं कि खाद बेंची गई या नहीं पर समिति में उर्वरक नहीं है। प्राप्त खाद की बिक्री का पैसा भी जमा नहीं किया गया। यदि खाद बेंची गई तो पैसा कहां गया? अगर पैसा नहीं जमा हुआ तो फिर खाद कहां गई? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। विभाग समिति से धन की वसूली का दबाव बना कर हार गया। पांच लाख 29 हजार रुपए बकाए पर करीब तीन लाख ब्याज चढ़ गया। इस रकम का हिसाब न मिलना घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है। आज तक पैसा जमा कराने के लिए समिति के जिम्मेदार या एआर कोआपरेटिव कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके। प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कइयों की गर्दन फंस सकती है।
दीवानगंज शाखा प्रबंधक की मानें तो समिति के सचिव के मुताबिक दो लाख की खाद खराब हो गई है। वह समिति के गोदाम में डंप है। अगर समिति के गोदाम में रखी खाद खराब हो गई तो प्रश्न यह है कि उसका जिम्मेदार कौन है। किसान खाद के लिए परेशान हैं और खाद बर्बाद हो रही है। लापरवाही के दोषी जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
चलाकपुर समिति की उर्वरक ऋण सीमा करीब तीन लाख है। मगर समिति पर पुराना बकाया इससे ज्यादा है। यही वजह है कि नया स्टाक नहीं दिया जा रहा। खाद न मिलने की वजह से किसान परेशान हैं। किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। उर्वरक में हुए खेल का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। प्रशासन इसे देखने के बजाए खामोश बैठा है।
दीवानगंज के शाखा प्रबंधक सतीश सिंह का कहना है कि सचिव अक्सर समिति बंद किए रहता है। वह कैश रजिस्टर और गोदाम का सत्यापन तक नहीं करा रहा। पैसा नहीं जमा तो खाद कहां गई जांच बगैर यह बता पाना मुश्किल है। प्रकरण में कई बार लिखा पढ़ी की गई है। जब तक हिसाब नहीं मिलता तब तक घोटाला नहीं पैसे का दुरुपयोग कहा जा सकता है।
एआर कोआपरेटिव आरडी पांडेय ने कहा कि जब तक लिखापढ़ी में हमारे पास कोई मामला नहीं आता, तब तक कार्रवाई नहीं कर सकते। चलाकपुर में कभी खाद बंटती ही नहीं। वजह यह है कि वहां दीवानगंज और चलाकपुर के बीच विवाद चल रहा है। लिखित शिकायत आएगी तो कार्रवाई जरूर होगी।

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