बच्चों के ड्रेस वितरण में गड़बड़झाला

Pratapgarh Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। प्राथामिक विद्यालयों में बच्चों को बंटने वाली ड्रेस में लंबा खेल हो रहा है। शासनादेश के विपरीत जिले में बनी बनाई ड्रेस बांटी जा रही है। करीब 80 रुपये की रेडीमेड ड्रेस के लिए दो से ढाई सौ रुपये का भुगतान हो रहा है जबकि रेडीमेड ड्रेस वितरण पर रोक है। बावजूद इसके रेडीमेड ड्रेस वितरण जिले में जोरों पर है।
नया सत्र शुरू हुए चौथा महीना चल रहा है। प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को ड्रेस देने के लिए 6.30 करोड़ रुपये भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। हालांकि यह पैसा अभी तक सभी स्कूलों में नहीं पहुंच सका है। शासनादेश के अनुसार यह ड्रेस रेडीमेड लेने की मनाही है। बच्चों की माप के अनुसार इसे सिलाया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जिन ब्लाकों में पैसा पहुंचा है वहां एबीएसए ने ड्रेस वितरण की कमान अपने कारखासों को थमा दी है। क्रय समिति को नजरंदाज कर रेडीमेड ड्रेस की खरीदारी के लिए प्रधानाध्यापकाें को डीएम और सीडीओ का फरमान बताया जा रहा है। गौरा ब्लाक में तो एक ही कंपनी का बिल कई स्कूलों से लगाया गया है। कई अन्य ब्लाकों का भी आलम यही है। जिले में तीन ट्रकों से रेडीमेड ड्रेस लाई गई है। दो ट्रक ड्रेस विकास भवन रोड पर एक कमरे में रखी गई है जबकि एक ट्रक ड्रेस भंगवाचुंगी के पास एक लाज में। गुणवत्ता और छात्रों की साइज का कोई खयाल नहीं रखा जा रहा है। बताते हैं कि जिस ड्रेस की कीमत बाजार में 80 से 100 रुपये है उसे दो से ढाई सौ रुपये में दिया जा रहा है। शासनादेश को दरकिनार कर ड्रेस वितरण में भारी खेल किया जा रहा है और अफसर खामोश हैं। सूत्रों की मानें तो हर स्कूल के ड्रेस वितरण में प्रधानाध्यापक से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों का हिस्सा होता है।
स्कूल में अभी ड्रेस के लिए पैसा नहीं आया लेकिन रेडीमेड बेचने वाले हर जगह पहुंचने लगे हैं। न कोई दुकान न ही सिलाई सेंटर, राजेश वस्त्रालय और जेएनआर टेलीकाम के नाम से फर्म चलाने वाले राजेश कुमार अपनी टीम के साथ मंगलवार की सुबह प्राथमिक विद्यालय दहिलामऊ द्वितीय पहुंच गए। वह प्रधानाध्यापक मीना पुष्पाकर से अपनी ड्रेस चयन करने का निवेदन कर रहे थे। अचानक रेडीमेड ड्रेस लेने की बाबत सवाल उठाने पर प्रधानाध्यापिका बोल पड़ीं। कहा कि अभी तो वह सैंपल ले रही हैं। बाजार से उसका मिलान कराने के बाद जो ठीक होगा वही बच्चों को दी जाएगी। इस बाबत बीएसए से बात नहीं हो सकी।
गौरा के एबीएसए विनोद मिश्र ने कहा कि जिलाधिकारी और सीडीओ का नाम लेकर कहीं ड्रेस नहीं दी जा रही है। हां हर बच्चे के नाप से सिलाई कराना संभव नहीं है इसलिए रेडीमेड की छूट दे दी गई है। व्यवहारिक रूप से ड्रेस सिलवाना संभव नहीं था।

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