सहकारी समितियों में ‘साइलेंट’ घपला!

Pratapgarh Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। साधन सहकारी समिति के कुछ जिम्मेदार ‘साइलेंट’ रूप से लाखों का घपला कर रहे हैं। समिति से कर्ज लेने वाले किसानों को गुमराह कर उन्हें लाखों का चूना लगाया जा रहा है। कर्ज अदायगी के बाद भी किसान लोन से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। जमा की गई रकम की रसीद किसानों को पूरे की दी जाती है। मगर बैंक में मौजूद रसीद पर रकम नहीं चढ़ाई जाती जबकि रसीद पर किसानों से हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। इस मामले का खुलासा जांच रिपोर्ट से हुआ है।
जिले के तमाम किसान साधन सहकारी समिति से कर्ज लेते हैं। समिति से लिए गए कर्ज को कृषक धीरे-धीरे जमा करते हैं। किसान को जमा की गई रकम की एक रसीद शाखा या समिति के जिम्मेदार देते हैं। किसानों को दी गई रसीद पर पूरा पैसा लिखा जाता है। मगर बैंक की शाखा व समिति में रहने वाली रसीद पर पैसे नहीं लिखे जाते जबकि इन दोनों रसीदों पर किसानों से हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। जरूरत पड़ी तो उन दोनों कोरी रसीदों पर थोड़ा बहुत पैसा भर कर बैंक भेज दिया जाता है अन्यथा सारा धन गड़ाप कर जाते हैं। ऐसा करने वाले लोग यदि खेल में सफल हुए तो किसान कर्ज जमा करने के बाद भी कर्जदार बने रहते हैं। सहकारी पर्यवेक्षक/शाखा प्रबंधक एटीएल की जांच में इस तरह के मामले प्रकाश में आए हैं। साधन सहकारी समिति लिमिटेड पूरे हिरामन सदर शाखा एटीएल में इस तरह की करीब आधा दर्जन से अधिक रसीदें उन्होंने पकड़ी हैं। यह पूरा प्रकरण ‘साइलेंट’ रूप से घपले की तरफ इशारा कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह तो एक उदाहरण है। यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि इस तरह का खेल अन्य कई समितियों व उनकी शाखाओं में हो रहा है।
किसानों को दी गई रसीद के मुताबिक उनका पैसा जमा हो गया होता है। मगर दो अन्य कोरी रसीदें यह बताती हैं कि बैंक तक पैसा नहीं पहुंचा। इस दो रसीद में एक साक्ष्य के तौर पर समिति या शाखा में होती है जबकि दूसरी हेड कार्यालय में जमा होती है। जरूरत पड़ी तो जमा रकम का कुछ हिसा उस पर चढ़ा कर मामला दबा दिया जाता है। जबकि धन का अधिकांश हिस्सा घपले की भेंट चढ़ जाता है। इस तरह किसान बैंक में कर्जदार बना रहता है।
सहकारी पर्यवेक्षक एवं शाखा प्रबंधक एटीएल आरपी सिंह ने कहा कि ऐसी रसीदें पकड़ी तो गई हैं। अब कितनी रसीद है यह बता पाना अभी मुश्किल है। दो रसीदों पर जमा की गई रकम क्यों नहीं लिखी गई? जबकि एक रसीद किसानों को दे दी गई है। प्रकरण की गहन पड़ताल होगी। मामला गंभीर है शीर्ष अफसरों के संज्ञान में लाया जाएगा।

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